जमशेदपुर। गदरा स्थित आनंद मार्ग जागृति में रविवार को आध्यात्मिक एवं सामाजिक सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तीन घंटे तक ‘बाबा नाम केवलम’ का अखंड कीर्तन हुआ। कीर्तन के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भक्ति और साधना में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान 50 जरूरतमंद महिलाओं के बीच कंबल और साड़ियों का वितरण किया गया। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गदरा क्षेत्र में ग्रामीणों के बीच घूम-घूमकर फलदार पौधे भी बांटे गए।
कीर्तन की समाप्ति के बाद लालबिहारी आनंद ने अपने आध्यात्मिक उद्बोधन में कहा कि ईश्वर की प्राप्ति का सबसे सहज और सरल माध्यम कीर्तन है। कीर्तन केवल भक्ति का अभ्यास नहीं, बल्कि मन को एकाग्र करने और परमात्मा से आत्मिक संबंध स्थापित करने का प्रभावी साधन है। इसके नियमित अभ्यास से व्यक्ति को मानसिक शांति, स्थिरता और आनंद की अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि कीर्तन के माध्यम से मनुष्य अपने मन को संयमित कर सकता है और सांसारिक विषयों के प्रति अनावश्यक आकर्षण से मुक्त होने की प्रेरणा प्राप्त करता है। यह मनुष्य को तनाव, चिंता और अशांति से दूर कर आंतरिक शक्ति को पहचानने में सहायता करता है। कीर्तन से प्रेम, सहानुभूति, सेवा और एकाग्रता की भावना विकसित होती है।
लालबिहारी आनंद ने कहा कि कीर्तन व्यक्ति को केवल आध्यात्मिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक-दूसरे के करीब लाता है। इससे सभी के प्रति प्रेम और सेवा का भाव जागृत होता है। उन्होंने कहा कि सभी प्राणियों में परमात्मा की उपस्थिति को महसूस करना ही आध्यात्मिक साधना का मूल उद्देश्य है। कार्यक्रम में आध्यात्मिक साधना के साथ जरूरतमंदों की सहायता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

