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Fri. Oct 30th, 2026

एनएमएल में विद्यार्थियों ने वैज्ञानिकों से जाना धातु और खनिजों का महत्व, प्रयोगशालाओं का किया भ्रमण

जमशेदपुर। सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर में शुक्रवार को जिज्ञासा कार्यक्रम के तहत पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, टाटानगर के आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। इसमें विद्यालय के 74 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 44 छात्राएं और 30 छात्र शामिल थे। उनके साथ चार शिक्षक-शिक्षिकाएं भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना और उन्हें अनुसंधान, तकनीक तथा नवाचार की दुनिया से रूबरू कराना था।

कार्यक्रम की शुरुआत फिट इंडिया फ्रीडम रन 2026 से हुई। इसमें विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लेकर स्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक सक्रियता और फिटनेस का संदेश दिया। इसके बाद एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में खनिजों और धातुओं की उपयोगिता बताते हुए उनके निष्कर्षण, प्रसंस्करण और इस्तेमाल में धातुकर्म विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका समझाई।

इस अवसर पर आईएमडीसी के प्रमुख एवं वैज्ञानिक डॉ. के. गोपाला कृष्णा ने विद्यार्थियों का स्वागत किया और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, वैज्ञानिक डॉ. अनिमेष जाना ने सीएसआईआर के जिज्ञासा कार्यक्रम की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा पैदा होती है और वे अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को एनएमएल की विभिन्न अनुसंधान प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिक सुविधाओं को करीब से देखने का अवसर मिला। उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ सीधा संवाद कर अनुसंधान से जुड़े सवाल पूछे। डॉ. अनिमेष जाना और डॉ. विनोद बेलवंशी ने स्वयं करके सीखने वाली गतिविधियों, जल के विद्युत अपघटन सहित विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों का प्रदर्शन किया। इसके बाद डॉ. के. गोपाला कृष्णा ने विज्ञान प्रश्नोत्तरी आयोजित की, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इस आयोजन को ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक गतिविधियों को प्रत्यक्ष देखने से किताबी ज्ञान को समझने में मदद मिली। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं के प्रति उत्साहित किया।

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