चाईबासा : नो एंट्री आंदोलन समिति, कोल्हान की ओर से मंगलवार को सदर अनुमंडल कार्यालय के समीप एकदिवसीय मौन धरना-प्रदर्शन किया गया। नो एंट्री जनआंदोलन के एक वर्ष पूरे होने पर आयोजित इस कार्यक्रम में आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने और सड़क सुरक्षा के लिए प्रभावी नो एंट्री व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।
समिति के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 को भारी वाहनों के परिचालन से होने वाली समस्याओं और सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया गया था। आंदोलनकारियों की मांग थी कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए भारी वाहनों के परिचालन को नियंत्रित किया जाए।
समिति ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और 16 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके अलावा 74 नामजद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। समिति ने इन मामलों की समीक्षा कर मुकदमे वापस लेने की मांग की।
धरना के माध्यम से तीन प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों की वापसी, संबंधित सड़कों पर प्रभावी नो एंट्री व्यवस्था लागू करना और गिरफ्तार व नामजद आंदोलनकारियों के मामलों का न्यायसंगत समाधान करना शामिल है। समिति ने कहा कि सड़क सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधा से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।
धरना-प्रदर्शन में आंदोलनकारी साधु चरण बानरा, वीर सिंह बालमुचू, संदीप सन्नी देवगम, राज तमड़िया, क्रांति तिरिया, साईमन लागुरी और बुरु हो उपस्थित रहे। चक्रधरपुर से सत्याजीत हेंब्रम और प्रकाश पुरती भी शामिल हुए। इनके अलावा महिला सामाजिक कार्यकर्ता सुशीला बोदरा, हिरामनी देवगम, अधिवक्ता एवं वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता रमेश जेराई तथा आदिवासी जन अधिकार मंच, रांची के सुखनाथ लोहरा ने भी कार्यक्रम में भाग लिया या समर्थन दिया।
नो एंट्री आंदोलन समिति, कोल्हान ने सरकार और प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर सड़क सुरक्षा तथा आंदोलन से जुड़े मामलों के समाधान के लिए ठोस पहल करने की अपील की।

