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साईनाथ देवस्थानम में ‘रूपं देहि–जयं देहि’ की गूंज, कथक और भरतनाट्यम से सजी महाषष्ठी की शाम

जमशेदपुर। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर घोड़ाबांधा, टेल्को स्थित श्री साईनाथ देवस्थानम में महाषष्ठी के दिन आयोजित शास्त्रीय नृत्य कार्यक्रम ‘रूपं देहि–जयं देहि’ में भक्ति, कला और भारतीय संस्कृति का मनमोहक संगम देखने को मिला। साई परिवार विश्व सेवा संस्थान, जमशेदपुर के तत्वावधान में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में कथक और भरतनाट्यम की प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने मां दुर्गा की महिमा का गुणगान किया। उनकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति, लयबद्ध पद संचालन और शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों ने श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में कोलकाता की कथक नृत्यांगना सौमिली घोष की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने देवी स्तुति के साथ नृत्य की शुरुआत की और अपनी भावाभिव्यक्ति के जरिए मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण को साकार किया। कथक की पारंपरिक शैली, मनमोहक मुद्राओं और प्रभावशाली लयकारी ने उनकी प्रस्तुति को विशेष बना दिया। उन्होंने ‘भवानी दायनी’ की प्रस्तुति के साथ अपने नृत्य का समापन किया। उनकी प्रस्तुति में भक्ति और शास्त्रीय सौंदर्य का सुंदर समन्वय दिखाई दिया।

झारखंड के सिनी से आईं भरतनाट्यम नृत्यांगना अंकिता राय ने अपनी प्रस्तुति से दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा की गरिमा को मंच पर उतारा। उनकी सुस्पष्ट मुद्राओं, अनुशासित नृत्य शैली और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने ‘दुर्गा माहेश्वरी’ और ‘गोकुल निरयल’ की प्रस्तुति के माध्यम से कार्यक्रम में आध्यात्मिकता और कलात्मक विविधता के रंग भरे। अंकिता राय झारखंड में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी हैं। उनकी उपलब्धि ने सांस्कृतिक मंच पर महिला प्रतिभा और सशक्तीकरण के महत्व को भी रेखांकित किया।

जमशेदपुर के कथक कलाकार तुषार दास ने देवी स्तुति और ‘गुरु चरण’ पर आधारित प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को और गरिमामय बनाया। उनकी प्रस्तुति में गुरु परंपरा के प्रति सम्मान, नृत्य साधना और भक्ति का भाव स्पष्ट रूप से झलका। उन्होंने कथक की लयात्मक विशेषताओं और भावप्रधान शैली के माध्यम से दर्शकों को शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया।

‘रूपं देहि–जयं देहि’ का भाव मां दुर्गा से शक्ति, सामर्थ्य, सौंदर्य और विजय का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना से जुड़ा है। इसी आध्यात्मिक भावना को केंद्र में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य को मनोरंजन से आगे बढ़कर साधना, उपासना और आत्मिक अनुभूति के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रत्येक प्रस्तुति ने भारतीय संस्कृति में निहित भक्ति भावना और कलात्मक अनुशासन की महत्ता को उजागर किया।

कार्यक्रम की खासियत कथक और भरतनाट्यम जैसी दो प्रमुख शास्त्रीय नृत्य विधाओं का एक मंच पर संगम रहा। इसने भारतीय सांस्कृतिक विविधता में एकता का संदेश दिया। ऐसे आयोजन न केवल नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं, बल्कि शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

साई परिवार विश्व सेवा संस्थान की ओर से आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या ने महाषष्ठी के अवसर को यादगार बना दिया। भक्ति, परंपरा और कला के समन्वय से सजी इस शाम में मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा के साथ भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रति सम्मान की भावना भी मुखर हुई। कार्यक्रम के दौरान कथक नृत्यांगना सौमिली घोष और भरतनाट्यम नृत्यांगना अंकिता राय से बातचीत भी की गई।

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