जमशेदपुर, 9 अक्टूबर। सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SCCI) ने 8 अक्टूबर 2026 को आयोजित 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में की गई प्रमुख सिफारिशों का स्वागत किया है। चैंबर के अधिवक्ता एवं उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल और अधिवक्ता एवं सचिव अंशुल रिंगसिया ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से ईमानदार करदाताओं को राहत मिलने, अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होने और जीएसटी अनुपालन प्रक्रिया सरल होने की उम्मीद है।
चैंबर के पदाधिकारियों के अनुसार, बैठक में जीएसटी दरों में किसी सामान्य बदलाव का प्रस्ताव नहीं किया गया है। हालांकि, जुर्माने में कमी, अभियोजन की सीमा बढ़ाने, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दायरे में विस्तार और रिफंड प्रक्रिया को तेज करने जैसे प्रस्ताव व्यापारियों एवं उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
जुर्माने और अभियोजन के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव
प्रस्तावित सिफारिशों के तहत सामान्य जुर्माने को 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने और अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की बात कही गई है। इसके अलावा, निर्धारित शर्तों के अधीन 10 हजार रुपये से कम के कर अंतर पर शो-कॉज नोटिस जारी नहीं करने का प्रस्ताव है। इससे छोटी तकनीकी, लेखांकन और रिपोर्टिंग संबंधी गलतियों के मामलों में कारोबारियों को राहत मिल सकती है।
गैर-धोखाधड़ी वाले पात्र मामलों में निर्धारित अवधि के भीतर कर और ब्याज जमा करने पर जुर्माने को पांच प्रतिशत तक सीमित करने का भी प्रस्ताव है। वहीं, इनपुट टैक्स क्रेडिट रोकने से पहले करदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की सिफारिश की गई है।
आईटीसी और रिफंड प्रक्रिया में राहत की उम्मीद
प्रस्तावित बदलावों में कर्मचारी स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, आउटडोर कैटरिंग, मुफ्त नमूने और कानून के अनुसार नष्ट किए गए एक्सपायर्ड माल जैसे कुछ खर्चों पर निर्धारित शर्तों के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति देने की बात शामिल है।
इसके साथ ही निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से प्रभावित व्यवसायों के लिए तेज प्रोविजनल रिफंड तथा पात्र इनपुट सेवाओं से जुड़े रिफंड की प्रक्रिया को सरल बनाने की सिफारिश की गई है। इससे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
पंजीकरण, रिटर्न और माल परिवहन की प्रक्रिया होगी सरल
चैंबर के अनुसार, कुछ जीएसटी पंजीकरण संशोधनों को स्वचालित रूप से संसाधित करने, रिटर्न संबंधी गलतियों को सुधारने और अनुपालन पूरा होने के बाद पंजीकरण बहाल करने की प्रक्रिया आसान बनाने का प्रस्ताव है। माल परिवहन के दौरान अनावश्यक जांच और वाहनों को रोकने की घटनाओं को कम करने के लिए भी आवश्यक कदम सुझाए गए हैं।
इसके अलावा, कुछ स्क्रैप लेन-देन पर रिवर्स चार्ज और टीडीएस से संबंधित नई अनुपालन आवश्यकताओं तथा पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए ई-इनवॉइसिंग के प्रस्तावित विस्तार पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।
अंतिम अधिसूचना तक मौजूदा नियमों का पालन जरूरी
राजीव अग्रवाल और अंशुल रिंगसिया ने व्यापारियों एवं उद्योगों को सलाह दी कि वे अपने लेखा सॉफ्टवेयर, विक्रेता रिकॉर्ड, इनपुट टैक्स क्रेडिट से संबंधित दस्तावेज और आंतरिक जीएसटी प्रक्रियाओं की समीक्षा करें, ताकि प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर उन्हें अपनाने में परेशानी न हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि परिषद की ये सिफारिशें हैं, तत्काल प्रभाव से लागू कानून नहीं। संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं, परिपत्रों और कानूनी संशोधनों के जारी होने तक कारोबारियों को वर्तमान जीएसटी प्रावधानों का पालन करना होगा। प्रस्तावों की अंतिम प्रभावी तिथि, पात्रता और अन्य शर्तें सरकार की अधिसूचनाओं के अनुसार तय होंगी।
सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने कहा कि वह व्यापारिक समुदाय की समस्याओं को उठाने और सरल, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जीएसटी व्यवस्था के समर्थन के लिए प्रतिबद्ध है।

