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UPI पर 0.4% MDR के प्रस्ताव का CAIT ने किया विरोध, वित्त मंत्री से वापस लेने की मांग

जमशेदपुर, 20 सितंबर 2026: ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR (Merchant Discount Rate) लगाने के प्रस्ताव का कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने विरोध किया है। CAIT के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेश सोंथालिया ने वित्त मंत्री को पत्र भेजकर प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है।

सुरेश सोंथालिया ने कहा कि प्रस्ताव का असर देशभर के छोटे व्यापारियों और MSME कारोबारियों पर पड़ेगा। उनके अनुसार, कम मार्जिन पर कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लागत बढ़ाने वाला होगा।

CAIT ने उठाए कई सवाल

CAIT का कहना है कि UPI लेनदेन पर MDR लगाने से इसका सीधा असर व्यापारियों की लागत पर पड़ेगा। संगठन ने तर्क दिया कि किसी व्यवसाय का टर्नओवर उसके मुनाफे के बराबर नहीं होता। रिटेल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, FMCG, हार्डवेयर, मोबाइल और ऑटो पार्ट्स जैसे कारोबार में कई बार शुद्ध मुनाफा सीमित होता है।

संगठन ने ₹2,000 की सीमा को भी अव्यावहारिक बताया है। CAIT के मुताबिक, आज के समय में ₹2,000 से अधिक के डिजिटल लेनदेन सामान्य हैं, लेकिन अधिक लेनदेन राशि का मतलब यह नहीं है कि व्यापारी का मुनाफा भी उतना ही अधिक है।

CAIT ने कहा कि व्यापारियों ने नकद से डिजिटल भुगतान की ओर बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है असर

CAIT ने दावा किया कि यदि व्यापारियों की लागत बढ़ती है तो इसका असर अंततः ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। संगठन के अनुसार, व्यापारी अतिरिक्त लागत को अपने मुनाफे से वहन कर सकते हैं, अन्य खर्चों में कटौती कर सकते हैं या कीमतों में इसका असर जोड़ सकते हैं।

संगठन ने कहा कि एक तरफ सरकार MSME क्षेत्र को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत छोटे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी और मुनाफे पर दबाव डाल सकती है।

जीरो-MDR व्यवस्था जारी रखने की मांग

CAIT ने सरकार से ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR को वापस लेने और मर्चेंट UPI लेनदेन के लिए मौजूदा जीरो-MDR व्यवस्था को जारी रखने की मांग की है।

इसके अलावा संगठन ने किसी भी तरह का शुल्क लागू करने से पहले व्यापारिक संगठनों और MSME प्रतिनिधियों के साथ व्यापक चर्चा करने की मांग की है। CAIT ने कम मार्जिन वाले कारोबार और छोटे व्यापारियों को लेनदेन शुल्क से सुरक्षा देने की भी मांग की है।

संगठन ने UPI इकोसिस्टम से जुड़े मुद्दों पर सरकार, RBI, NPCI, बैंकों, फिनटेक कंपनियों और व्यापारिक संगठनों की संयुक्त समिति बनाने का सुझाव भी दिया है।

सुरेश सोंथालिया ने कहा कि व्यापारी वर्ग डिजिटल इंडिया और Ease of Doing Business का साझेदार रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान के विस्तार के पक्ष में रहते हुए भी व्यापारियों पर अतिरिक्त लेनदेन शुल्क का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।

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