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*हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहीं लुपुंगुटु की ग्रामीण महिलाएं*

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ट्राइसम महिला विकास सहयोग समिति, लुपुंगुटु की पहल बदलाव की मिसाल बन रही है। समिति से जुड़ी 69 महिलाएं प्रशिक्षण लेकर सिलाई-बुनाई, अचार निर्माण और मसाज सहित विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।

समिति की महिलाओं को उनकी रुचि और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार के अवसरों के अनुसार अलग-अलग कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने सीखे हुए हुनर को आजीविका का साधन बनाया। कई महिलाएं कपड़ों की कटिंग और सिलाई कर आय अर्जित कर रही हैं। वहीं घर पर तैयार किए गए विभिन्न प्रकार के अचार और अन्य घरेलू उत्पाद भी स्थानीय बाजार में बेचे जा रहे हैं।

प्रशिक्षण के बाद कुछ महिलाओं ने अपने काम को आगे बढ़ाते हुए दुकान के माध्यम से उत्पादों की बिक्री भी शुरू की है। समिति से जुड़ी जेमा कड़ाईबुरु ने प्रशिक्षण लेने के बाद शहीद चौक पर दुकान लेकर अपने बनाए सामानों की बिक्री शुरू की। वहीं समिति की सदस्य समित्रा सुंडी भी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने परिवार के पालन-पोषण में आर्थिक योगदान दे रही हैं।

समिति से जुड़ी महिलाओं की सामूहिक भागीदारी इस पहल की खास बात है। महिलाएं एक-दूसरे से सीखने, उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर करने और स्थानीय बाजार तक पहुंच बनाने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। इससे उनमें सहयोग और आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हो रही है।

जिला प्रशासन की ओर से भी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली पहलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि विभिन्न योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे और प्रशिक्षण लेने वाले लोग अपने हुनर को स्वरोजगार से जोड़ सकें।

पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि महिलाओं को केवल प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके हुनर को स्वरोजगार और बाजार से जोड़ना भी जरूरी है। ग्रामीण महिलाओं में कई पारंपरिक और व्यावहारिक कौशल मौजूद हैं। उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर इन्हें आय के स्थायी साधन में बदला जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। ट्राइसम महिला विकास सहयोग समिति की महिलाओं द्वारा सिलाई-बुनाई, अचार निर्माण और अन्य गतिविधियों को स्वरोजगार के रूप में अपनाना महिला सशक्तीकरण का अच्छा उदाहरण है। इससे अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

समिति से जुड़ी 69 महिलाओं की यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में कौशल विकास और स्वरोजगार के बीच एक मजबूत कड़ी बन रही है। स्थानीय स्तर पर उत्पादों की बिक्री से महिलाओं को आय का अवसर मिलने के साथ महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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