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सीएसआईआर-एनएमएल में हिंदी सप्ताह का भव्य शुभारंभ, हिंदी को वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यों का प्रभावी माध्यम बनाने पर जोर

जमशेदपुर। सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला में सोमवार को हिंदी सप्ताह समारोह का भव्य शुभारंभ हुआ। समारोह का आयोजन 14 सितंबर से 22 सितंबर 2026 तक किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रयोगशाला के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधुरी ने की, जबकि साहित्यकार डॉ. अरुण सज्जन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि डॉ. अरुण सज्जन ने हिंदी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कार और संस्कृति की परिचायक है। उन्होंने कहा कि हिंदी की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता एवं वैज्ञानिकता है। हिंदी जैसी बोली जाती है, सामान्यतः उसी अनुरूप लिखी भी जाती है, जिससे इसे सीखना और समझना सहज होता है। उन्होंने कहा कि हिंदी के माध्यम से तकनीकी और वैज्ञानिक कार्यों को भी सरल एवं प्रभावी ढंग से आम लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। विश्व व्यापार को आगे बढ़ाने में भी हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों में होने वाले शोध और तकनीकी उपलब्धियों का लाभ तभी व्यापक स्तर पर समाज तक पहुंचेगा, जब उन्हें आमजन की समझ वाली भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा। इस दिशा में हिंदी प्रभावी माध्यम साबित हो सकती है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधुरी ने सभी प्रयोगशाला कर्मियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला में हिंदी सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा है और इसके प्रचार-प्रसार तथा अधिकाधिक प्रयोग की जिम्मेदारी सभी की है। स्वतंत्रता आंदोलन में भी हिंदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और आजादी के बाद इसे राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया।

डॉ. घोष चौधुरी ने कहा कि हिंदी भाषा के साथ संस्कार, संस्कृति और परंपरा भी जुड़ी हुई है। वैज्ञानिक संस्थानों का दायित्व है कि वे अपनी खोजों और उपलब्धियों को आम जनता तक पहुंचाएं। इसके लिए हिंदी एक प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य हो रहा है, लेकिन अभी और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में राजभाषा के नियमों के अनुपालन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यालय से जारी होने वाले ज्ञापन, अधिसूचनाएं, सूचनाएं, निविदाएं आदि आवश्यकतानुसार द्विभाषी रूप में जारी किए जाएं। हिंदी में प्राप्त पत्रों का उत्तर भी हिंदी में दिया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला ‘क’ क्षेत्र में स्थित है, इसलिए ‘क’ और ‘ख’ क्षेत्र के कार्यालयों के साथ मूल पत्राचार हिंदी में करने की दिशा में सभी को जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करना चाहिए।

इस अवसर पर प्रयोगशाला की हिंदी अधिकारी डॉ. रानू वर्मा ने हिंदी सप्ताह के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि 14 से 22 सितंबर तक परिसर में विभिन्न हिंदी संबंधी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना और कर्मचारियों को राजभाषा के अधिकाधिक उपयोग के लिए प्रेरित करना है।

समारोह के अंत में प्रयोगशाला के प्रशासन नियंत्रक जय शंकर शरण ने मुख्य अतिथि, निदेशक सहित सभी अतिथियों और उपस्थित कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी से हिंदी सप्ताह के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लेने और कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लेने की अपील की।

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