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जेल से 9 साल बाद रिहा हुआ पूर्व माओवादी जोनल सचिव कान्हू मुंडा, गांव पहुंचने पर छलके परिजनों के आंसू

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले में भाकपा माओवादी के पूर्व जोनल सचिव कान्हू मुंडा शनिवार को करीब नौ साल सात माह बाद जेल से रिहा होकर अपने पैतृक गांव गुड़ाबांदा प्रखंड के जियान स्थित बनगोड़ा टोला पहुंचा। गुड़ाबांदा थाना प्रभारी सुमित कुमार के नेतृत्व में पुलिस सुरक्षा के बीच उसे उसके घर तक पहुंचाया गया। लंबे समय बाद कान्हू को सामने देखकर पत्नी वैशाखी मुंडा, बच्चों और माता-पिता की आंखें खुशी से भर आईं। परिजनों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ उसका स्वागत किया।

कान्हू मुंडा ने 15 फरवरी 2017 को अपने सात साथियों और हथियारों के साथ तत्कालीन एसएसपी अनूप टी मैथ्यू के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। आत्मसमर्पण के बाद उसे पहले घाटशिला जेल में रखा गया। इसके बाद जमशेदपुर के घाघीडीह जेल, हजारीबाग केंद्रीय कारा और अंत में पश्चिम बंगाल की पुरूलिया जेल में बंद रहा। अंतिम मामले की सुनवाई के बाद पुरूलिया न्यायालय से उसे जमानत मिली, जिसके बाद उसकी रिहाई हुई।

कान्हू के अनुसार, उसके खिलाफ दर्ज कई मामलों में पुलिस द्वारा पुनः अनुसंधान किए जाने के बाद उसका नाम हटा दिया गया था। शेष 35 मामलों में भी अधिकांश में साक्ष्य के अभाव में वह बरी हो चुका है। वर्तमान में दो मामलों में उसे जमानत मिली है। इनमें मुसाबनी में नागरिक सुरक्षा समिति के अध्यक्ष धनाई किस्कू हत्याकांड और पुरूलिया का एक मामला शामिल है।

करीब एक दशक बाद गांव लौटे कान्हू मुंडा ने कहा कि अब समय बदल चुका है। उसके अनुसार समाज और क्षेत्र में बदलाव बंदूक या हिंसा से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदान के माध्यम से ही संभव है। उसने युवाओं से भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखने की बात कही।

कान्हू के परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। उसकी बड़ी बेटी चेन्नई में शिक्षिका के रूप में कार्यरत है, जबकि छोटी बेटी और बेटा स्नातक की पढ़ाई पूरी कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। परिवार के बीच लौटने के बाद कान्हू ने नए सिरे से सामान्य जीवन शुरू करने की इच्छा जताई।

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