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Wed. Sep 9th, 2026

ओलचिकी लिपि में संताली पठन सामग्री प्रकाशित करने की रघुवर दास ने की मांग

नई दिल्ली। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर संताली भाषा की पुस्तकों और शैक्षणिक सामग्रियों का प्रकाशन उसकी मूल एवं स्वीकृत ओलचिकी लिपि में कराने का आग्रह किया। इस संबंध में उन्होंने शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि संताली भाषा की पाठ्य पुस्तकों, संदर्भ सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शिकाओं और डिजिटल संसाधनों को देवनागरी के बजाय ओलचिकी लिपि में तैयार किया जाना चाहिए।

रघुवर दास ने शिक्षा मंत्री को बताया कि शिक्षा मंत्रालय और उससे जुड़े संस्थानों की ओर से विभिन्न भाषाओं में पाठ्य पुस्तकों एवं शैक्षणिक सामग्रियों के निर्माण और प्रकाशन का कार्य किया जा रहा है। ऐसे में संताली भाषा की पुस्तकों को देवनागरी लिपि में तैयार किए जाने की चर्चा के बीच उन्होंने ओलचिकी लिपि के महत्व और इसके व्यापक उपयोग का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में पूरे देश में ओलचिकी लिपि का शताब्दी वर्ष गौरव और उत्साह के साथ मनाया गया। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय स्तर के शताब्दी समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों भारतीय संविधान के ओलचिकी लिपि में संताली अनुवाद का लोकार्पण भी किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि 30 जून को हूल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर ओलचिकी लिपि में संदेश दिए जा चुके हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल में संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिला था। संताली की अपनी स्वतंत्र और वैज्ञानिक लिपि ओलचिकी है, जिसका प्रयोग झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और असम सहित कई राज्यों में होता है। उन्होंने कहा कि नेपाल और बांग्लादेश में भी ओलचिकी लिपि का व्यापक इस्तेमाल किया जाता है।

रघुवर दास ने झारखंड में ओलचिकी लिपि के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि संताल बहुल क्षेत्रों के रेलवे स्टेशनों के नामपट्ट और विभिन्न सरकारी कार्यालयों के नाम ओलचिकी लिपि में लिखे गए हैं। साहित्य अकादमी की ओर से संताली भाषा के लिए ओलचिकी लिपि में साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों की वेबसाइटों पर भी संताली भाषा की सामग्री ओलचिकी लिपि में उपलब्ध है।

उन्होंने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि एनसीईआरटी समेत शिक्षा मंत्रालय के अधीन सभी संबंधित संस्थानों को निर्देश जारी किया जाए कि संताली भाषा की पाठ्य पुस्तकें, संदर्भ सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शिकाएं और डिजिटल शैक्षणिक संसाधन अनिवार्य रूप से ओलचिकी लिपि में ही तैयार और प्रकाशित किए जाएं। इससे संताली भाषियों की भाषाई एवं सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी। रघुवर दास ने बताया कि शिक्षा मंत्री के साथ इस मुद्दे पर हुई बातचीत सकारात्मक रही।

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