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Wed. Aug 12th, 2026

गोविंदपुर में सड़क हादसों के खिलाफ सर्वदलीय बैठक, भारी वाहनों की नो-एंट्री और स्पीड ब्रेकर की मांग

जमशेदपुर। गोविंदपुर अन्ना चौक के समीप लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर स्थानीय लोगों में बढ़ते आक्रोश के बीच बुधवार को प्रतिभा केंद्र मैदान में सर्वदलीय एवं सामाजिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने क्षेत्र में लगातार हो रहे हादसों पर चिंता जताते हुए प्रशासन से यातायात व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की। बैठक में दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए सड़क सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने पर जोर दिया गया।

बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उप विकास आयुक्त और यातायात पुलिस के उपाधीक्षक से मुलाकात कर सात सूत्री मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधियों ने भारी वाहनों के परिचालन के लिए निर्धारित नो-एंट्री व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की। उनका कहना था कि सुबह पांच बजे से नौ बजे तक, दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक तथा शाम पांच बजे से रात 11 बजे तक भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई जाए। साथ ही गोविंदपुर के सभी प्रमुख प्रवेश और निकासी मार्गों पर नो-एंट्री के समय की जानकारी देने वाले बड़े और स्पष्ट सूचना पट लगाने की मांग की गई।

प्रतिनिधियों ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए अधिकतम गति सीमा 10 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित करने तथा विभिन्न स्थानों पर कम से कम 20 गति सीमा संबंधी सूचना पट लगाने की मांग की। इसके अलावा चिन्हित दुर्घटना संभावित स्थानों पर कम से कम 10 गति अवरोधक बनाने की मांग भी रखी गई।

गोविंदपुर गिट्टी मशीन के समीप घनी आबादी वाले क्षेत्र को विशेष रूप से संवेदनशील बताते हुए वहां मजबूत लोहे की बैरिकेडिंग कराने की मांग की गई। प्रतिनिधियों के अनुसार, इस स्थान पर अब तक सड़क हादसों में चार लोगों की मौत हो चुकी है। अन्ना चौक से काली मंदिर तक पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था कराने की मांग भी की गई। इसके लिए निर्वाण बिजली कंपनी से सहयोग लेने का सुझाव दिया गया।

बैठक में गोविंदपुर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पांच कमरों वाले यातायात पुलिस केंद्र की व्यवस्था करने और सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो स्थानीय लोग आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

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