रांची: झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग की धुर्वा स्थित कार्यालय में हुई आंतरिक बैठक में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े शिक्षा, सामाजिक, आर्थिक और कानूनी मुद्दों को लेकर कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए। आयोग ने राज्य में अल्पसंख्यक निदेशालय, मदरसा बोर्ड और उर्दू अकादमी के गठन के साथ-साथ अरबी-फारसी विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में पहल करने का फैसला लिया। इसके अलावा अल्पसंख्यक विकास वित्त आयोग के गठन और मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर प्रभावी कानून बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने की। इसमें उपाध्यक्ष प्रणेश सोलोमन, शमशेर आलम और ज्योति सिंह मथारू के अलावा सदस्य वारिस कुरैशी, डॉ. एम. तौसीफ, रंजीत कुमार मल्लिक, सविता टुडू और इकरारुल हसन मौजूद रहे। आयोग के सचिव मुमताज अली ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
इमरोज़ मॉब लिंचिंग मामले पर आयोग गंभीर
बैठक में चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र के बड़गांव में मोहम्मद इमरोज़ की मॉब लिंचिंग कर हत्या किए जाने का मामला प्रमुखता से उठा। आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने सदस्यों को मामले की जानकारी देते हुए घटना की कड़ी निंदा की।
उन्होंने कहा कि मोहम्मद इमरोज़ की बेरहमी से हत्या की गई और घटना के दौरान पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर भी गंभीर सवाल उठते हैं। आयोग की पहल के बाद चतरा एसपी ने घटनास्थल पर मौजूद दो सब-इंस्पेक्टर समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित किया है। आयोग ने इस कार्रवाई की सराहना की।
हालांकि, बैठक में थाना प्रभारी के खिलाफ अब तक इसी तरह की कार्रवाई नहीं होने पर चिंता जताई गई। आयोग की ओर से कहा गया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार थाना प्रभारी के घटनास्थल पर पहुंचने के बाद भी इमरोज़ के साथ मारपीट हुई। आयोग ने माना कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती तो संभव है कि इमरोज़ की जान बचाई जा सकती थी।
आयोग ने इस मामले में अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान और उपाध्यक्ष प्रनीश सुलेमान की ओर से संयुक्त और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का फैसला लिया है। आयोग के सचिव को निर्देश दिया गया कि डीजीपी और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर एक सप्ताह के भीतर मामले में अब तक हुई जांच और कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाए।
सोशल मीडिया पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश पर भी नजर
बैठक में संवेदनशील घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर माहौल खराब करने की कोशिशों पर भी चर्चा हुई। आयोग ने कहा कि ऐसे मामलों को सांप्रदायिक रंग देने, किसी धर्म विशेष को निशाना बनाने और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल से सामाजिक माहौल खराब करने की कोशिशों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
आयोग के सचिव को डीजीपी और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर ऐसे मामलों में कानून के तहत कार्रवाई की मांग करने का निर्देश दिया गया।
पिछले तीन वर्षों की मॉब लिंचिंग घटनाओं की समीक्षा की मांग
आयोग ने पिछले तीन वर्षों में राज्य में हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं और कथित तौर पर पुलिस की मारपीट या कार्रवाई के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की मौत से जुड़े मामलों की भी समीक्षा करने की जरूरत बताई।
बैठक में हजारीबाग में रूपेश पाठक की मॉब लिंचिंग के मामले का भी उल्लेख हुआ। आयोग ने कहा कि इस मामले में मंत्रियों के घटनास्थल पर पहुंचने और मुआवजे की घोषणा किए जाने का उदाहरण सामने है। बैठक में सवाल उठाया गया कि अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मॉब लिंचिंग के मामलों में पीड़ित परिवारों के लिए इसी तरह की राहत और मुआवजे की व्यवस्था क्यों नहीं हो पाई है।
झारखंड में अरबी-फारसी विश्वविद्यालय की मांग
शिक्षा के मुद्दे पर आयोग ने झारखंड में अरबी-फारसी विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव रखा। बैठक में बिहार के मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय की तर्ज पर झारखंड में भी अरबी और फारसी भाषा एवं शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय स्थापित करने की जरूरत पर चर्चा हुई।
आयोग ने राज्य सरकार से इस दिशा में पहल करने की अपील करने का फैसला लिया। इसके साथ ही आलिम और फाजिल की डिग्री की मान्यता तथा इसकी कानूनी और शैक्षणिक स्थिति से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई।
मदरसा बोर्ड और उर्दू अकादमी के गठन का प्रस्ताव
बैठक में झारखंड में अल्पसंख्यक निदेशालय, मदरसा बोर्ड और उर्दू अकादमी के गठन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। आयोग ने कहा कि इन संस्थानों की जरूरत को लेकर पहले भी कई बैठकों में चर्चा हो चुकी है, लेकिन अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
आयोग ने तीनों संस्थानों के गठन के लिए औपचारिक प्रस्ताव पारित किया और राज्य सरकार से इस दिशा में तेजी से कार्रवाई करने की अपील करने का निर्णय लिया।
अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद भरने पर जोर
अल्पसंख्यक स्कूलों की स्थिति की भी बैठक में समीक्षा की गई। आयोग ने स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने और विद्यार्थियों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
विद्यार्थियों को पर्याप्त किताबें उपलब्ध कराने के साथ ड्रेस और साइकिल वितरण योजनाओं से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। आयोग ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक लाभ जरूरतमंद विद्यार्थियों तक पहुंचना चाहिए।
अल्पसंख्यक विकास वित्त आयोग बनाने की मांग
बैठक में अल्पसंख्यक विकास वित्त आयोग के गठन का मुद्दा भी उठाया गया। आयोग ने कहा कि झारखंड में अब तक इस संस्था का गठन नहीं होने के कारण अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को आर्थिक और कारोबारी गतिविधियों के लिए वित्तीय सुविधाएं हासिल करने में परेशानी होती है।
आयोग ने जल्द से जल्द अल्पसंख्यक विकास वित्त आयोग के गठन की जरूरत बताई, ताकि समुदाय के लोगों को ऋण और अन्य वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत हो सके।
बैठक में TCDC के माध्यम से अल्पसंख्यकों को मिलने वाले ऋण से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। आयोग ने इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया।
सरकारी योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचाने पर जोर
आयोग ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा, सामाजिक स्थिति और आर्थिक विकास से जुड़ी योजनाएं केवल सरकारी फाइलों और कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।
लंबित मामलों के समाधान के लिए संबंधित सरकारी विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और आवश्यक कदम उठाने पर भी बैठक में सहमति बनी।
बैठक के अंत में आयोग के सदस्यों ने अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के साथ संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाने और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया।

