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Fri. Aug 7th, 2026

ओत गुरु कोल लाको बोदरा के पैतृक आवास के जीर्णोद्धार और स्मारक निर्माण की मांग तेज

 

चाईबासा: खुंटपानी प्रखंड के पासेया हातु गांव में जन्मे हो भाषा की वारंगक्षित लिपि के प्रणेता एवं साहित्यकार ओत गुरु कोल लाको बोदरा के पैतृक आवास की जर्जर स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है। बताया गया कि पिछले वर्ष तेज आंधी और बारिश के दौरान आवास की एस्बेस्टस की छत उड़ जाने से भवन की स्थिति काफी खराब हो गई है। इसके कारण भवन के संरक्षण और जीर्णोद्धार की मांग लगातार उठ रही है।

इस संबंध में आदिवासी हो समाज उत्थान समिति, खुंटपानी प्रखंड, क्षेत्र के मानकी-मुंडा, सेवानिवृत्त कर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों की एक बैठक कुछ माह पूर्व उललीगुटू चौक में आयोजित की गई थी। बैठक में सर्वसम्मति से खरसावां जाने वाले मुख्य सड़क चौक पर ओत गुरु कोल लाको बोदरा की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पासेया हातु गांव के प्रवेश द्वार का निर्माण कराया जाए, ताकि हो समाज के महान साहित्यकार और वारंगक्षित लिपि के जनक को उचित सम्मान मिल सके। इस संबंध में जिला उपायुक्त को आवेदन सौंपा जा चुका है। बताया गया कि संबंधित विभाग द्वारा आवेदन की जांच की जा रही है और आगे की प्रक्रिया जारी है।

इसके अलावा ओत गुरु कोल लाको बोदरा के पैतृक आवास के जीर्णोद्धार तथा भवन की नई छत निर्माण कराने के लिए टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा संचालित मिशन को भी आवेदन दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भवन हो समाज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है, इसलिए इसका संरक्षण आवश्यक है।

सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन और संबंधित संस्थाओं से मांग की है कि ओत गुरु कोल लाको बोदरा की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए आवास का शीघ्र जीर्णोद्धार कराया जाए, गांव का प्रवेश द्वार बनाया जाए तथा प्रस्तावित प्रतिमा स्थापना की प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।

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