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Wed. Oct 7th, 2026

धनबाद स्टेशन पर दून एक्सप्रेस से 49 जीवित कछुए बरामद, तस्करी की आशंका

धनबाद। धनबाद रेलवे स्टेशन पर वन्यजीव तस्करी के खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल और अपराध खुफिया शाखा की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दून एक्सप्रेस से 49 जीवित कछुए बरामद किए हैं। मंगलवार को की गई इस कार्रवाई के दौरान कछुओं को ट्रेन के सामान्य श्रेणी के कोच में सीट के नीचे लावारिस हालत में रखे दो बैग और एक झोले से बरामद किया गया। बरामद सभी कछुए जीवित थे, जिन्हें आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद देर शाम वन विभाग को सौंप दिया गया।

जानकारी के अनुसार, आरपीएफ के निरीक्षक प्रभारी के निर्देश पर आरपीएफ धनबाद और सीआईबी की टीम धनबाद स्टेशन पर आपराधिक गतिविधियों की रोकथाम के लिए गश्त और निगरानी कर रही थी। इसी दौरान टीम को गुप्त सूचना मिली कि ट्रेन संख्या 13010 योगनगरी ऋषिकेश-हावड़ा दून एक्सप्रेस के माध्यम से कछुओं की तस्करी की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए टीम ने ट्रेन के धनबाद स्टेशन पहुंचने पर संबंधित सामान्य कोच की तलाशी शुरू की।

जांच के दौरान कोच संख्या ईआर 247131 में सीट के नीचे दो बैग और एक झोला संदिग्ध अवस्था में रखा मिला। टीम ने आसपास बैठे यात्रियों से सामान के संबंध में पूछताछ की, लेकिन किसी भी यात्री ने बैग और झोले पर अपना अधिकार नहीं जताया। इसके बाद यात्रियों की मौजूदगी में संदिग्ध सामान को खोलकर उसकी जांच की गई। तलाशी के दौरान तीनों सामान से कुल 49 जीवित कछुए बरामद हुए।

प्रारंभिक जांच में बरामद कछुओं की पहचान इंडियन फ्लैपशेल प्रजाति के रूप में की गई है। इनका वैज्ञानिक नाम लिसेमिस पंक्टाटा है। कछुओं को जब्त करने के बाद आरपीएफ और सीआईबी टीम ने मामले की आवश्यक जानकारी संबंधित वन विभाग को दी। बाद में सभी 49 जीवित कछुओं को नियमानुसार वन विभाग के अधिकारियों को सुपुर्द कर दिया गया।

अधिकारियों के अनुसार, मामले में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कछुओं को कहां से लाया गया था और उन्हें कहां ले जाया जा रहा था। सामान पर किसी व्यक्ति के दावा नहीं करने के कारण तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है। रेलवे मार्ग से वन्यजीवों की तस्करी रोकने के लिए आरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां ट्रेनों तथा स्टेशनों पर लगातार निगरानी अभियान चला रही हैं।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत संरक्षित वन्यजीवों का अवैध शिकार, कब्जा, खरीद-बिक्री और परिवहन दंडनीय अपराध है। बरामद कछुओं को वन विभाग को सौंपे जाने के बाद आगे की कार्रवाई विभागीय नियमों के अनुसार की जाएगी।

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