Breaking
Mon. Aug 3rd, 2026

जेएफसी बंद करने का फैसला बोर्ड का, खेल विकास के प्रति टाटा स्टील की प्रतिबद्धता रहेगी कायम

जमशेदपुर : जमशेदपुर फुटबॉल क्लब (जेएफसी) के संचालन को बंद करने के फैसले को लेकर उठ रहे सवालों के बीच टाटा स्टील ने पहली बार आधिकारिक रूप से अपना पक्ष रखा है। सोमवार को कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदररामम ने कहा कि जेएफसी को बंद करने का निर्णय टाटा स्टील के निदेशक मंडल (बोर्ड) द्वारा व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले का किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, आर्थिक संकट या अन्य विवाद से कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने कहा कि टाटा स्टील ने हमेशा खेलों को सामाजिक दायित्व और प्रतिभा संवर्धन के माध्यम के रूप में देखा है। कंपनी का उद्देश्य कभी भी खेलों से व्यावसायिक लाभ अर्जित करना नहीं रहा, बल्कि खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना, खेल संस्कृति को मजबूत बनाना और युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना रहा है। इसी सोच के तहत वर्ष 2017 में जमशेदपुर एफसी की शुरुआत की गई और पिछले नौ वर्षों में क्लब ने भारतीय फुटबॉल में अपनी अलग पहचान स्थापित की।

डीबी सुंदररामम ने बताया कि जेएफसी के संचालन पर टाटा स्टील ने प्रतिवर्ष लगभग 30 से 35 करोड़ रुपये का निवेश किया। अन्य प्रायोजकों के सहयोग के साथ अब तक क्लब पर करीब 320 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान क्लब ने कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं और भारतीय फुटबॉल में सम्मानजनक स्थान बनाया, जिस पर कंपनी को गर्व है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में टाटा स्टील अपनी खेल नीति के तहत जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करने पर अधिक जोर देगी। कंपनी पहले से ही 19 विभिन्न खेल अकादमियों का संचालन कर रही है और अब 7 से 19 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों के प्रशिक्षण एवं विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनका कहना था कि मजबूत ग्रासरूट प्रणाली ही भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की नींव तैयार करती है।

जेएफसी के कोचिंग स्टाफ को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि क्लब से जुड़े सभी कोच और तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति उनकी योग्यता, अनुभव और प्रदर्शन के आधार पर की गई थी। सभी ने क्लब के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और कंपनी उनके योगदान का सम्मान करती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन खिलाड़ियों के साथ क्लब के अनुबंध अभी प्रभावी हैं, उन्हें अनुबंध की सभी शर्तों के अनुसार पूरा भुगतान किया जाएगा। साथ ही कंपनी यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि इन खिलाड़ियों को अन्य फुटबॉल क्लबों में अवसर मिल सकें, जिससे उनके पेशेवर करियर पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

डीबी सुंदररामम ने कहा कि जेएफसी का संचालन बंद होने का अर्थ यह नहीं है कि जमशेदपुर में फुटबॉल गतिविधियां समाप्त हो जाएंगी। टाटा स्टील आगे भी स्थानीय फुटबॉल प्रतियोगिताओं, क्लबों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और युवा खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग देती रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि शहर की समृद्ध फुटबॉल परंपरा भविष्य में भी कायम रहेगी और नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलते रहेंगे।

Related Post