चाईबासा: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला संगठन सचिव मन्नाराम कुदादा ने कहा है कि सामाजिक संगठनों की आड़ लेकर सार्वजनिक और सरकारी जमीन पर कब्जा करने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज और सामाजिक संगठनों के झंडे का सम्मान सभी करते हैं, लेकिन किसी संगठन के नाम और झंडे का इस्तेमाल निजी स्वार्थ के लिए जमीन कब्जाने या विवाद खड़ा करने के उद्देश्य से किया जाना गलत है।
मन्नाराम कुदादा ने कहा कि जिस तरह कुछ स्थानों पर धार्मिक झंडे लगाकर बाद में मंदिर या अन्य धार्मिक संरचनाओं के निर्माण के माध्यम से जमीन पर दावा करने की कोशिश की जाती है, उसी प्रकार सामाजिक संगठनों के झंडे का इस्तेमाल कर सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा करने की प्रवृत्ति भी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठन समाज के हित, अधिकार और विकास के लिए कार्य करते हैं, न कि सार्वजनिक स्थलों पर निजी स्वार्थ साधने के लिए।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में टाटा बाईपास चौक पर दिशूम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना के विरोध के दौरान एक सामाजिक संगठन का झंडा लगाने का प्रयास किया गया था। इस पर झामुमो कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताते हुए विरोध किया। उनका कहना था कि किसी भी सार्वजनिक स्थल पर सक्षम प्रशासनिक अनुमति के बिना किसी संगठन का झंडा लगाना या उस स्थान पर अधिकार जताने का प्रयास उचित नहीं है।
मन्नाराम कुदादा ने कहा कि दिशूम गुरु शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के महानायक और राज्य की पहचान हैं। उनकी प्रतिमा स्थापना को लेकर यदि किसी को आपत्ति है तो वह लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रख सकता है, लेकिन किसी सामाजिक संगठन के नाम पर विवाद पैदा करना या सार्वजनिक स्थल पर कब्जे की कोशिश करना उचित नहीं है।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण और अवैध कब्जे की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि कोई व्यक्ति या संगठन सामाजिक या धार्मिक भावनाओं की आड़ में जमीन पर कब्जा करने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि झामुमो सामाजिक संगठनों और समाज के सम्मान का पक्षधर है, लेकिन सामाजिक भावनाओं का इस्तेमाल निजी स्वार्थ के लिए करने वालों का हमेशा विरोध करेगा।

