चाईबासा: पूर्व मंत्री एवं पूर्व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने पश्चिमी सिंहभूम जिले में अवैध खनन, क्रशर संचालन और डीएमएफटी (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) तथा सीएसआर फंड के उपयोग को लेकर राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रेस बयान जारी कर कहा कि जिले में रोजगार देने वाली करीब 40 खदानें बंद हैं, जबकि सेल, टाटा और कुछ निजी खदानों का संचालन जारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जो खदानें कागजों में बंद दिखाई जा रही हैं, वहां अवैध खनन जारी है। इसके साथ ही अवैध रूप से क्रशर संचालित किए जा रहे हैं और अवैध दस्तावेजों के सहारे जिले से लौह अयस्क की ढुलाई की जा रही है।
बड़कुंवर गागराई ने कहा कि हाल ही में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के प्रति लोगों को जागरूक करने और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने के लिए वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ बड़ाजामदा और नोवामुंडी क्षेत्र गए थे। इस दौरान उन्होंने वहां कथित रूप से अवैध खनन, क्रशर संचालन और लौह अयस्क की ढुलाई होते देखी। उनका आरोप है कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन, वन विभाग, खनन विभाग और पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से यह सब हो रहा है।
उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और ग्रामीणों को डीएमएफटी फंड तथा सीएसआर योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें इसका उचित लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों में आज भी लोगों को शुद्ध पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
बड़कुंवर गागराई ने कहा कि डीएमएफटी फंड केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों का विकास करना है। उनका आरोप है कि इस फंड का सही उपयोग नहीं हो रहा है और विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अवैध खनन से माफिया तंत्र और प्रशासन को लाभ पहुंच रहा है तथा यह सब राज्य सरकार की देखरेख में हो रहा है।

