चाईबासा: चाईबासा व्यवहार न्यायालय परिसर में हाटगम्हरिया थाना पुलिस द्वारा एक युवक को कथित रूप से गलत पहचान के आधार पर हिरासत में लेने के मामले की आदिवासी हो समाज युवा महासभा की जिला समिति ने कड़ी निंदा की है। संगठन ने आपातकालीन बैठक कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
महासभा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि प्राप्त जानकारी के अनुसार चाईबासा हत्याकांड के एक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए हाटगम्हरिया थाना पुलिस सिविल ड्रेस में व्यवहार न्यायालय परिसर पहुंची थी। आरोप है कि पुलिस ने जिस आरोपी की तलाश की जा रही थी, उसकी जगह गलत पहचान के आधार पर चक्रधरपुर निवासी संदीप बोदरा को हिरासत में ले लिया। बताया गया कि संदीप बोदरा अपने एक मामले की पैरवी के सिलसिले में न्यायालय आया हुआ था।
विज्ञप्ति के अनुसार प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि युवक को घसीटते हुए खनन विभाग कार्यालय के समीप ले जाया गया और उसके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। बाद में उसे पुलिस वाहन में बैठा लिया गया। कुछ समय बाद पुलिस को अपनी गलती का एहसास होने पर उसे व्यवहार न्यायालय परिसर के बाहर छोड़ दिया गया।
आदिवासी हो समाज युवा महासभा के जिला अध्यक्ष शेरसिंह बिरुवा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने से पहले पुलिस को समुचित जांच-पड़ताल और पर्याप्त तथ्यों का सत्यापन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त आधार किसी निर्दोष व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना कानून के शासन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के विपरीत है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय परिसर से किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना अनिवार्य है।
महासभा ने बताया कि इस मामले की शिकायत झारखंड के मुख्यमंत्री तथा राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से की जाएगी। संगठन ने घटना में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों की निष्पक्ष जांच कर उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है।
बैठक में जिला सचिव ओयबन हेम्ब्रम, कोषाध्यक्ष सत्यभरत बिरुवा, योगेश्वर पिंगुवा, धनपति पिंगुवा, थॉमस बिरुवा, कमलेश बिरुवा, करन होनहागा सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।

