Breaking
Mon. Jul 6th, 2026

तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब की ऐतिहासिक महत्ता पर अवतार सिंह भाटिया का संदेश, श्रद्धालुओं के लिए की मंगलकामना

जमशेदपुर: सिख समाज आंदोलन समिति के अध्यक्ष और झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी के सीनियर एडवाइजर सरदार अवतार सिंह भाटिया ने तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब की ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह स्थान केवल सिख आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देश की साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है।

उन्होंने बताया कि तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब सिखों के पांच प्रमुख तख्तों में दूसरा प्रमुख तख्त है। इसी पावन भूमि पर दशम गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म हुआ और उनका बाल्यकाल यहीं बीता। तख्त साहिब के निकट स्थित गुरुद्वारा बाल लीला उस दिव्य इतिहास का साक्षी है, जहां गुरु गोविंद सिंह की बाल लीलाएं हुईं।

भाटिया ने कहा कि पटना साहिब में स्थित प्रत्येक गुरुद्वारा अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान रखता है। उन्होंने विशेष रूप से तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब, गुरुद्वारा गऊ घाट, गुरुद्वारा कंगन घाट, गुरुद्वारा गुरु का बाग और दानापुर स्थित गुरुद्वारा हांडी साहब का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी स्थलों का सिख इतिहास में विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि गुरुद्वारा हांडी साहब पटना सिटी से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

उन्होंने गंगा तट से जुड़े गुरुद्वारों की ऐतिहासिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय गुरुद्वारा कंगन घाट के समीप से गंगा का प्रवाह होता था, जो अब काफी दूर खिसक चुका है। इन स्थलों से दशम गुरु के जीवन की अनेक ऐतिहासिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं, जिन्हें उस समय पाटलिपुत्र के लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा और अनुभव किया था।

अवतार सिंह भाटिया ने कहा कि गुरु घर में सच्चे मन और श्रद्धा के साथ की गई अरदास कभी व्यर्थ नहीं जाती। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्रद्धा और सेवा भाव से आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं गुरु की कृपा से पूर्ण होती हैं।

उन्होंने हाल ही में तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब पहुंचकर मत्था टेकने वाले श्रद्धालुओं के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए अरदास की कि गुरु गोविंद सिंह सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्रदान करें तथा उनके जीवन के प्रत्येक शुभ संकल्प को पूरा करें।

भाटिया ने कहा कि देशभर के गुरुद्वारे सदैव मानवता, समानता, सेवा और भाईचारे का संदेश देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म, संप्रदाय या समुदाय के प्रति भेदभाव की भावना का सिख परंपरा में कोई स्थान नहीं है। गुरु घर सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए समान रूप से खुले हैं और सभी का सम्मान एवं स्वागत करते हैं।

उन्होंने कहा कि सिख समाज आंदोलन समिति और झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी सभी धर्मों के लोगों की आस्था का सम्मान करती हैं और समाज में आपसी सद्भाव, सौहार्द तथा धार्मिक समरसता को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेंगी।

Related Post