जमशेदपुर। करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह की हत्या को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इसी कड़ी में एनसीपी (नगर निकाय) के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. पवन पांडेय ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना है।
उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की मौजूदगी में और पुलिस वाहन से किसी व्यक्ति को बाहर निकालकर उस पर जानलेवा हमला कर हत्या कर दी जाती है, तो आम नागरिकों के मन में अपनी सुरक्षा को लेकर स्वाभाविक रूप से चिंता पैदा होगी। ऐसी घटनाएं कानून के शासन और प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।
डॉ. पांडेय ने कहा कि घटना के बाद कुछ अधिकारियों का तबादला किया गया है, लेकिन केवल तबादले को पर्याप्त कार्रवाई नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि गंभीर मामलों में जिम्मेदारी तय करना और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना अधिक आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने कहा कि अक्सर बड़ी घटनाओं के बाद प्रशासनिक फेरबदल कर मामले को शांत करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन इससे व्यवस्था में स्थायी सुधार नहीं आता। यदि लापरवाही या कर्तव्य में चूक करने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तो जवाबदेही की भावना भी विकसित नहीं होगी।
डॉ. पांडेय ने कहा कि इस मामले को किसी जाति, धर्म या राजनीतिक दल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। अपराधी की पहचान केवल अपराधी के रूप में होनी चाहिए और कानून का व्यवहार सभी के साथ समान होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि घटना में शामिल हमलावरों, साजिशकर्ताओं, संरक्षण देने वालों और यदि किसी स्तर पर पुलिस की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों की भी निष्पक्ष जांच कर दोष सिद्ध होने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जनता के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर कई तरह की आशंकाएं और धारणाएं बनी हुई हैं। ऐसे में सरकार को पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि तथ्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो और आम लोगों का विश्वास बहाल हो सके।
डॉ. पवन पांडेय ने कहा कि झारखंड की जनता केवल प्रशासनिक तबादले नहीं, बल्कि जवाबदेही, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई चाहती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मामले में ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जाए, जिससे भविष्य में कोई भी अपराधी कानून और पुलिस व्यवस्था को चुनौती देने का साहस न कर सके।

