जमशेदपुर। साकची स्थित रामलीला मैदान में शनिवार को श्री श्री रामलीला उत्सव समिति की ओर से आयोजित रामलीला में बनारस से आए कलाकारों ने सीता हरण और भगवान श्रीराम-हनुमान-सुग्रीव मिलन के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को रामायण के उन महत्वपूर्ण प्रसंगों से रूबरू कराया, जिनमें भक्ति, समर्पण, धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश का संदेश निहित है। रामलीला के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा और दर्शक भगवान श्रीराम की लीलाओं में भावविभोर नजर आए।
मंचन के दौरान माता सीता के हरण का प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। रावण द्वारा साधु का वेश धारण कर माता सीता को छलने और उनका अपहरण करने की घटना को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस प्रसंग के माध्यम से दर्शकों को बताया गया कि छल, अहंकार और अधर्म का मार्ग अंततः विनाश की ओर ले जाता है। माता सीता का हरण रामायण की कथा का ऐसा निर्णायक मोड़ है, जिसके बाद भगवान श्रीराम का संघर्ष केवल अपनी पत्नी की खोज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अन्याय और अधर्म के विरुद्ध धर्म की स्थापना का व्यापक उद्देश्य बन जाता है।
रामलीला के अगले प्रसंग में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की भेंट हनुमानजी से होती है। हनुमानजी की भक्ति, विवेक और विनम्रता इस प्रसंग की प्रमुख विशेषता रही। हनुमानजी भगवान श्रीराम को सुग्रीव से मिलवाते हैं, जिसके बाद दोनों के बीच मित्रता स्थापित होती है। यह मिलन रामायण में सहयोग, विश्वास और मित्रता की शक्ति का प्रतीक है। सुग्रीव के साथ मित्रता के माध्यम से माता सीता की खोज और रावण के विरुद्ध संघर्ष की दिशा आगे बढ़ती है।
धार्मिक दृष्टि से राम-सुग्रीव मिलन का प्रसंग यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में सच्चे सहयोग, विश्वास और धर्म के प्रति निष्ठा से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है। वहीं, हनुमानजी का चरित्र सिखाता है कि निस्वार्थ सेवा, समर्पण और प्रभु के प्रति अटूट श्रद्धा मनुष्य को महान बनाती है।
बनारस से आए कलाकारों ने संवाद, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया। रामलीला के जरिए श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता के धैर्य और हनुमानजी की अनन्य भक्ति को अपने जीवन में अपनाने का संदेश मिला। साकची रामलीला मैदान में आयोजित यह धार्मिक आयोजन शहर की रामलीला परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम बना।

