जमशेदपुर, 24 सितंबर। बेल्डीह क्लब में गुरुवार को दो दिवसीय सीआईआरकॉन 2026 सर्कुलैरिटी सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। “इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से वैलोराइजेशन की पुनर्कल्पना” विषय पर आयोजित सम्मेलन में उद्योग, शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और स्टार्टअप क्षेत्र के विशेषज्ञों ने संसाधनों के बेहतर उपयोग, औद्योगिक अपशिष्ट के पुनर्चक्रण और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा की।
सम्मेलन का आयोजन टाटा स्टील लिमिटेड ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स जमशेदपुर चैप्टर, सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला जमशेदपुर और इंडियन सिरेमिक सोसाइटी के सहयोग से किया है। उद्घाटन समारोह में पद्म भूषण डॉ. वी. के. सारस्वत, पूर्व सदस्य नीति आयोग, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। टाटा स्टील के कॉरपोरेट सर्विसेज के उपाध्यक्ष डी. बी. सुंदर रामम और एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक डॉ. गौतम सूत्रधार विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता टाटा स्टील के आईबीएमडी के एग्जीक्यूटिव-इन-चार्ज दीपांकर दासगुप्ता ने की, जबकि सीआईआरकॉन 2026 के संयोजक भार्गव धवाला ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
डॉ. वी. के. सारस्वत ने जलवायु परिवर्तन और बढ़ते कार्बन फुटप्रिंट को बड़ी चुनौती बताते हुए सर्कुलैरिटी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नई और टिकाऊ तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नवाचार आधारित समाधानों के जरिए संसाधनों के अधिकतम उपयोग और अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलने पर जोर दिया।
डी. बी. सुंदर रामम ने कहा कि संसाधन दक्षता और टिकाऊ औद्योगिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना टाटा स्टील की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कोयले तथा उससे जुड़े उप-उत्पादों, जिसमें राख भी शामिल है, के शत-प्रतिशत उपयोग की दिशा में कंपनी के प्रयासों को रेखांकित किया।
डॉ. गौतम सूत्रधार ने देश में महत्वपूर्ण धातुओं की बढ़ती मांग का उल्लेख करते हुए संसाधनों की पुनर्प्राप्ति, पुनः उपयोग और जिम्मेदार निस्तारण को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के साथ संसाधनों की खपत भी बढ़ रही है। ऐसे में संसाधन दक्षता, अपशिष्ट से उपयोगी सामग्री की प्राप्ति और नई टिकाऊ तकनीकों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
उद्घाटन सत्र के बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स जमशेदपुर चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. अतनु रंजन पाल के समन्वयन में “द डिफिकल्ट लास्ट माइल ऑफ सर्कुलैरिटी: कैन एवरी इंडस्ट्रियल वेस्ट फाइंड ए होम?” विषय पर परिचर्चा हुई। इसमें औद्योगिक अपशिष्ट के अंतिम स्तर तक प्रबंधन और उसके उपयोग की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
सम्मेलन में करीब 200 प्रतिभागी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हितधारक शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान औद्योगिक उप-उत्पादों, अपशिष्ट और द्वितीयक संसाधनों को तकनीकी नवाचार एवं उद्यमिता के माध्यम से उपयोगी और मूल्यवान सामग्री में बदलने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।
सीआईआरकॉन 2026 में खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधन पुनर्प्राप्ति, भारतीय कोयले में दुर्लभ मृदा तत्व, खनिज मूल्य श्रृंखला में संसाधन दक्षता, शहरी खनन, महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति तथा प्रदूषण और संसाधन पुनर्प्राप्ति के आर्थिक पहलुओं पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अलावा स्लैग और फ्लाई ऐश का उपयोग, महत्वपूर्ण धातुओं की पुनर्प्राप्ति, रिफ्रैक्टरी पुनर्चक्रण, लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग, ई-वेस्ट प्रबंधन, कार्बन कैप्चर, सर्कुलर स्टील निर्माण और नई पीढ़ी की संसाधन पुनर्प्राप्ति तकनीकों पर भी विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
सम्मेलन में स्टार्टअप्स के लिए “इनोवेशंस फॉर ए सर्कुलर फ्यूचर” नाम से विशेष पिच मंच भी रखा गया है। इसके माध्यम से स्टार्टअप अपनी नई तकनीकों और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े समाधान विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन का उद्देश्य उद्योग, अकादमिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ाना तथा संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन के लिए तकनीकी, व्यावहारिक और आर्थिक रूप से उपयोगी समाधान विकसित करने को प्रोत्साहित करना है।

