चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम ग्रामीण संवेदक संघ ने जिले में निर्माण कार्यों से जुड़ी समस्याओं को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री को दो अलग-अलग पत्र भेजकर आवश्यक पहल की मांग की है। संघ ने जिले में बालू एवं गिट्टी के माइनिंग टेंडर नहीं होने के कारण रॉयल्टी भुगतान में आ रही परेशानी तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 में DMFT फंड से होने वाली निविदाओं के Estimate को संशोधित अनुसूचित दर के अनुरूप तैयार कराने की मांग की है।
संघ का कहना है कि पश्चिमी सिंहभूम जिले में वर्तमान में बालू एवं गिट्टी के माइनिंग टेंडर नहीं होने के कारण संवेदकों को निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली सामग्री की रॉयल्टी प्राप्त करने और भुगतान करने में कठिनाई हो रही है। विभिन्न विभागों द्वारा टेंडर और एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूरी करने के बाद संवेदकों को कार्य शुरू करने का निर्देश दिया जाता है, लेकिन रॉयल्टी व्यवस्था स्पष्ट नहीं होने से कार्य स्थल पर बालू और गिट्टी की व्यवस्था करने में परेशानी होती है। इसका असर निर्माण कार्यों की समयसीमा और लंबित बिलों के भुगतान पर भी पड़ रहा है।
संघ ने मुख्यमंत्री से पूर्व की तरह बालू एवं गिट्टी की रॉयल्टी भुगतान और जमा करने की व्यवस्था सुचारू कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।
दूसरे पत्र में संघ ने कहा है कि 31 अगस्त 2026 से झारखंड में संशोधित अनुसूचित दर लागू किए जाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में वित्तीय वर्ष 2026-27 में DMFT फंड से होने वाली सभी निविदाओं के Estimate को संशोधित अनुसूचित दर के अनुरूप पुनः तैयार कराने के लिए उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम को निर्देश देने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि इससे संवेदकों को आर्थिक कठिनाइयों से राहत मिलेगी और सरकारी योजनाओं का गुणवत्तापूर्ण एवं सुचारु क्रियान्वयन हो सकेगा।
मौके पर ग्रामीण संवेदक संघ के अध्यक्ष सुनील सिरका, कोषाध्यक्ष मो० राज, सचिव अरुण कु० पोद्दार, उपाध्यक्ष मासूम राजा, उपाध्यक्ष बैद्यनाथ गोप, मो० सिकंदर, गोविंद चंद्र पान, प्रकाश पिंगुवा, अविनाश कु० सिरका और सतीश सिरका मौजूद थे।

