जमशेदपुर। आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। जीवन संस्था के निदेशक डॉ. जे. जैन ने बुधवार को बिष्टुपुर स्थित संस्था के कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पिछले कुछ वर्षों में जमशेदपुर में आत्महत्या के मामलों में लगातार कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में जहां 285 लोगों ने आत्महत्या की थी, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 175 रह गई। वर्ष 2026 में अब तक 108 लोगों ने अलग-अलग कारणों से आत्महत्या की है।
डॉ. जे. जैन ने कहा कि जीवन संस्था की ओर से लगातार काउंसलिंग, जागरूकता कार्यक्रम और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। संस्था का उद्देश्य तनाव, अवसाद और एंग्जाइटी से जूझ रहे लोगों की परेशानी को समय रहते पहचानकर उन्हें मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि समय पर मिलने वाली काउंसलिंग और भावनात्मक सहयोग से कई लोगों को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने में मदद मिली है।
उन्होंने बताया कि जीवन संस्था की ओर से स्कूलों, कॉलेजों और औद्योगिक क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक, सेमिनार और कार्यशालाओं के माध्यम से आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूकता पैदा की जा रही है। संस्था का प्रयास है कि लोग मानसिक तनाव को छिपाने के बजाय अपने परिवार, मित्रों या विशेषज्ञों के साथ साझा करें और जरूरत पड़ने पर समय रहते मदद लें। संवाददाता सम्मेलन में संस्था की ज्वाइंट डायरेक्टर गुरप्रीत कौर भाटिया और डिप्टी डायरेक्टर सुचित्रा भी मौजूद थीं।
10 सितंबर को माइकल जॉन ऑडिटोरियम में जागरूकता कार्यक्रम
डॉ. जैन ने बताया कि विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर 10 सितंबर को माइकल जॉन ऑडिटोरियम में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में टाटा स्टील यूआईएसएल के एमडी अतुल भटनागर मुख्य अतिथि और अरका जैन यूनिवर्सिटी के प्रो-वीसी डॉ. अंगद तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस दौरान वर्ष 2025 में स्कूल और कॉलेजों में चलाए गए जागरूकता अभियानों के तहत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मानसिक तनाव और परेशानियों से जूझ रहे लोगों की सहायता के लिए जीवन संस्था ने 9297777499 और 9297777500 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। संस्था का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को मानसिक दबाव की स्थिति में अकेले रहने के बजाय अपनी परेशानी साझा करनी चाहिए।
पारिवारिक विवाद आत्महत्या का प्रमुख कारण
जीवन संस्था के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में पारिवारिक विवाद और क्लेश के कारण सबसे अधिक 29 लोगों ने आत्महत्या की। वर्ष 2026 में अब तक पारिवारिक विवाद से जुड़े मामलों में 18 लोगों ने अपनी जान दी है। इसके अलावा अकेलापन, मानसिक तनाव और प्रेम संबंधों से जुड़ी परेशानियां भी आत्महत्या के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 में कुल 258 आत्महत्याओं में 25 छात्र शामिल थे। वर्ष 2021 में 255 आत्महत्याओं में 23 छात्र, वर्ष 2022 में 206 मामलों में 18 छात्र, वर्ष 2023 में 207 मामलों में 20 छात्र और वर्ष 2024 में 181 मामलों में 20 छात्र शामिल रहे। वर्ष 2025 में कुल आत्महत्या के मामलों की संख्या 175 रही, जिनमें 15 छात्र थे। वर्ष 2026 में अब तक 108 आत्महत्या के मामले सामने आए हैं, जिनमें चार छात्र शामिल हैं।

