जमशेदपुर। रक्षा बंधन के अवसर पर चाकुलिया प्रखंड की भातकुंडा पंचायत स्थित सुनसुनिया जंगल में गुरुवार को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया गया। जोहार भारत फाउंडेशन महासमिति के तत्वावधान में आयोजित समारोह में लोगों ने पेड़ों को भाई का प्रतीक मानते हुए रक्षा सूत्र बांधा और जंगल को हर हाल में सुरक्षित रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चाकुलिया थाना प्रभारी राजेश कुमार तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में घाटशिला की जिला परिषद सदस्य देवयानी मुर्मू और जमशेदपुर की विजया लक्ष्मी शामिल हुईं।
मुख्य अतिथि राजेश कुमार ने कहा कि जंगलों को बचाने की मुहिम में वन सुरक्षा समिति और जोहार भारत फाउंडेशन के सदस्यों की भूमिका प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन पूरी तरह प्रकृति और जंगलों पर निर्भर है। जंगलों का अस्तित्व बचाना आज सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बच्चों के जन्म जैसे शुभ अवसरों पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएं। उन्होंने कहा कि पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए पहचान और विरासत बन सकते हैं।
देवयानी मुर्मू ने पद्मश्री जमुना टुडू के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने छोटे से गांव से निकलकर वन संरक्षण को जनअभियान का रूप दिया है। उन्होंने कहा कि जंगलों के लगातार कम होने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है और वे भोजन तथा पानी की तलाश में गांवों की ओर पहुंच रहे हैं। इसलिए जंगलों की रक्षा के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
पद्मश्री जमुना टुडू ने कहा कि रक्षा बंधन के दिन पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लेना प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जंगल सुरक्षित होंगे तो पेड़-पौधों के साथ पशु-पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं का अस्तित्व भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने लोगों से प्रत्येक शुभ अवसर पर पौधरोपण करने की अपील की।
समारोह से पहले अतिथियों का पत्तों से बनी टोपी पहनाकर और पारंपरिक नृत्य के साथ स्वागत किया गया। कार्यक्रम के समापन पर पौधरोपण किया गया और मांदर व धमसा की थाप पर पारंपरिक नृत्य हुआ। सभी ने जंगल की सुरक्षा की शपथ ली। इस अवसर पर एसआई पितांबर मंडल, सेवानिवृत्त शिक्षक रामस्वरूप यादव, राजीव महापात्र, मानसिंह टुडू, जमुना गोप, चन्द्रमोहन मांडी, सुमित्रा महतो, माधवी महतो, मंजू महतो, मालती टुडू, लिलावती दास, मालती महतो, बिंदु महतो, हेमावती महतो, पूर्णेन्दु महतो, निमाई हांसदा और अप्पू दास समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

