चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में तकनीकी गड़बड़ी के कारण 4.50 लाख रुपये के कथित नुकसान के मामले में एचडीएफसी सिक्योरिटीज लिमिटेड के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया। आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह के न्यायालय में सीसी केस संख्या 14/2025 की सुनवाई हुई। मामले की संस्थापन तिथि 8 अप्रैल 2025, अंतिम सुनवाई 27 जुलाई 2026 और फैसला 22 अगस्त 2026 को घोषित किया गया।
मामला पश्चिमी सिंहभूम के नखासा गांव निवासी सुशील कुमार हेम्ब्रम, पिता स्वर्गीय विजय सिंह हेम्ब्रम से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 3 अक्टूबर 2024 को एचडीएफसी सिक्योरिटीज की ऑनलाइन सेवा और दूरभाष सहायता केंद्र में तकनीकी समस्या के कारण वह समय पर अपने शेयर और विकल्प नहीं बेच सके। इससे उन्हें करीब 4.50 लाख रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये और मुकदमा खर्च के लिए 20 हजार रुपये समेत कुल 4.90 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी।
कंपनी की ओर से आयोग के समक्ष कहा गया कि शिकायतकर्ता नियमित रूप से वायदा एवं विकल्प कारोबार में शामिल थे और इंटरनेट आधारित कारोबार से जुड़े जोखिमों की जानकारी वाले दस्तावेज को स्वीकार कर चुके थे। हालांकि कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि 3 अक्टूबर 2024 को करीब सुबह 11:45 बजे से दोपहर 2:25 बजे तक राष्ट्रीय शेयर बाजार के वायदा कारोबार के आदेशों से संबंधित तकनीकी समस्या आई थी।
आयोग ने कहा कि केवल तकनीकी गड़बड़ी होने से 4.50 लाख रुपये के वास्तविक नुकसान की पुष्टि नहीं होती। शिकायतकर्ता को यह साबित करना जरूरी था कि किस समय कौन सा आदेश दिया गया था, किस कीमत पर उसका निष्पादन हो सकता था, उस समय संबंधित खरीद आदेश उपलब्ध था या नहीं और तकनीकी समस्या के कारण वास्तविक एवं प्रत्यक्ष नुकसान कितना हुआ।
आयोग ने यह भी माना कि बाद में विकल्प कारोबार से छह से दस गुना लाभ कमाने की संभावना केवल अनुमान पर आधारित थी। दूसरे कारोबारियों को हुए लाभ को शिकायतकर्ता के व्यक्तिगत नुकसान का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने फैसले में उच्चतम न्यायालय के श्रीकांत जी. मंत्री बनाम पंजाब नेशनल बैंक मामले में दिए गए सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि लाभ कमाने के उद्देश्य से सीधे जुड़ी सेवाओं का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्य के लिए माना जा सकता है।
आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता नियमित रूप से वायदा एवं विकल्प कारोबार कर रहे थे। इसलिए ब्रोकरेज सेवा का उपयोग व्यक्तिगत जरूरत के बजाय व्यावसायिक उद्देश्य से किया जा रहा था। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(7) के तहत उपभोक्ता की परिभाषा में नहीं आते।
इन आधारों पर आयोग ने शिकायत खारिज कर दी। मामले में कंपनी पर कोई हर्जाना या मुकदमा खर्च नहीं लगाया गया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता के लिए प्रतिभूति बाजार से संबंधित अन्य सक्षम नियामकीय या मध्यस्थता मंच पर जाने का रास्ता खुला रहेगा।

