चाईबासा: राज्य में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के रद्द होने और कई परीक्षाओं के सीआईडी जांच के दायरे में आने को लेकर एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष एवं रांची लोकसभा और ईचागढ़ विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी धी. रामहरि पेरियार ने सरकार और भर्ती व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
रामहरि पेरियार ने कहा कि 22 परीक्षाओं का रद्द होना और 17 मामलों का सीआईडी जांच के दायरे में आना केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की मेहनत और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि भर्ती नीति की कमी, प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट व्यवस्था का खामियाजा युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और पढ़ाई पर पैसे खर्च करते हैं। परीक्षा के बाद अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आने पर पूरी प्रक्रिया रद्द कर दी जाती है। इससे अभ्यर्थियों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रामहरि पेरियार ने कहा कि सरकारें और चेहरे बदलते रहे, लेकिन रोजगार की तलाश कर रहे झारखंड के युवाओं की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। उन्होंने सवाल किया कि यदि परीक्षा आयोजित करने वाली व्यवस्था पारदर्शी और सुरक्षित नहीं है तो उसकी कीमत अभ्यर्थियों से क्यों वसूली जाए। जिस स्तर पर गलती हुई है, वहां जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी लंबित भर्ती परीक्षाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। सीआईडी जांच के मामलों में दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और राज्य में पारदर्शी वार्षिक भर्ती कैलेंडर लागू किया जाए।
उन्होंने अभ्यर्थियों की उम्र और वर्षों की मेहनत को देखते हुए आवश्यक आयु सीमा में छूट देने की मांग भी की। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की, जिससे भविष्य में प्रश्नपत्र लीक, भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।
रामहरि पेरियार ने कहा कि झारखंड के युवाओं को भाषण और आश्वासन नहीं, बल्कि रोजगार और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया चाहिए। उनके अनुसार 22 परीक्षाओं का रद्द होना भर्ती व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

