चाईबासा: झारखंड में सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और बढ़ते दबाव के बीच भाकपा (माओवादी) के 16 कुख्यात नक्सलियों ने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया है। ये सभी माओवादी 28 जुलाई 2026 को पुलिस मुख्यालय, रांची में झारखंड पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर कुल 60 लाख रुपये का इनाम घोषित है।
आत्मसमर्पण करने वालों में 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमांडर संतोष उर्फ गांधी शामिल है। इसके अलावा 10-10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर अश्विन और चंदन लोहार भी पुलिस के समक्ष हथियार डालेंगे। इनके साथ तीन सब-जोनल कमांडर, जिन पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित है, भी आत्मसमर्पण करेंगे। इसके अलावा तीन एरिया कमांडर, छह दस्ता कैडर और तीन सक्रिय सदस्य भी मुख्यधारा में लौटने जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली अपने आधुनिक हथियारों और भारी मात्रा में गोला-बारूद के साथ पुलिस के समक्ष सरेंडर करेंगे। यह पूरा माओवादी दस्ता लंबे समय से झारखंड के कोल्हान और सारंडा के दुर्गम जंगलों तथा पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय था। बताया गया है कि यह नेटवर्क एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा से जुड़ा हुआ था और उसके नेतृत्व में विभिन्न गतिविधियों में शामिल रहा है।
राज्य में हाल के महीनों में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले 21 मई 2026 को भी एक बड़े अभियान के तहत 25 माओवादियों सहित कुल 27 नक्सलियों ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार चल रहे अभियान, विकास कार्यों और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं और कई सदस्य हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस सामूहिक आत्मसमर्पण को झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेष रूप से कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को इससे बड़ा झटका लगने की संभावना है। साथ ही, यह कदम क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

