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अवैध लौह अयस्क खनन में सरकार, प्रशासन विभागों और माफियाओं की मिलीभगत, कार्रवाई नहीं होने पर होगा आंदोलन: बड़कुंवर गागराई

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में कथित अवैध लौह अयस्क खनन और परिवहन को लेकर पूर्व मंत्री एवं पूर्व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, खनन विभाग, वन विभाग और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध पश्चिमी सिंहभूम जिले में वर्षों से बड़ी संख्या में खदानें बंद पड़ी हैं, जिसके कारण हजारों स्थानीय युवक-युवतियां रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, चोरी-छिपे बड़े पैमाने पर लौह अयस्क का अवैध खनन और परिवहन लगातार जारी है।

बड़कुंवर गागराई ने बताया कि उन्हें अपने सहयोगियों और कार्यकर्ताओं से सूचना मिली थी कि बड़ाजामदा क्षेत्र में अवैध रूप से लौह अयस्क निकालकर विभिन्न क्रेशरों में भेजा जा रहा है। सूचना मिलने के बाद वह स्वयं बड़ाजामदा पहुंचे और कई स्थानों का निरीक्षण किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि महेश्वरी क्रेशर, राजा क्रेशर, पद्मावती क्रेशर और राहुल क्रेशर में अवैध रूप से लाए गए लौह अयस्क को राइका तथा नोवामुंडी क्षेत्र का बताकर वैध दिखाया जा रहा है और गलत तरीके से चालान बनाकर बाहर भेजा जा रहा है। उनके अनुसार यह कार्य सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है और इसमें संबंधित विभागों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। उनका कहना है कि यदि जिला खनन विभाग, वन विभाग और पुलिस प्रशासन ईमानदारी से काम करें तो जिले में अवैध खनन एक दिन भी नहीं चल सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विभागों की कथित रूप से अवैध खनन माफियाओं के साथ मिलीभगत के कारण प्रतिदिन भारी मात्रा में लौह अयस्क का अवैध खनन और परिवहन हो रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है।

बड़कुंवर गागराई ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम की खनिज संपदा का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बंद खदानों के कारण हजारों मजदूर बेरोजगार हैं, जबकि दूसरी ओर अवैध कारोबार करने वाले लोग जिले की प्राकृतिक संपदा का दोहन कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को बंद खदानों को नियमानुसार शुरू कर स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए।

उन्होंने राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, अवैध खनन में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

पूर्व मंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले उनके संज्ञान में जेटिया थाना क्षेत्र का एक मामला भी आया था, जिसमें अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक ग्रामीण को कथित रूप से बंदूक दिखाकर डराया-धमकाया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पीड़ित ग्रामीण के द्वारा खनन विभाग को लिखित शिकायत भी दी है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बड़कुंवर गागराई ने वर्तमान राज्य सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड में इंडिया गठबंधन की सरकार है और सबसे बड़ी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में शामिल दलों के नेता स्वयं अवैध खनन के खिलाफ ज्ञापन सौंपते हैं, जबकि प्रशासन भी उन्हीं की सरकार के अधीन काम करता है। उनके अनुसार यह स्थिति गंभीर और चिंताजनक है तथा जनता सब कुछ देख रही है।

उन्होंने कहा कि अब केवल ज्ञापन देने से काम नहीं चलेगा। यदि अवैध खनन पर शीघ्र रोक नहीं लगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनआंदोलन करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मामले को राज्य सरकार, केंद्र सरकार और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा, ताकि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सके।

बड़कुंवर गागराई ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम की खनिज संपदा पर पहला अधिकार यहां के लोगों का है। इसलिए सरकार को स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा करते हुए बंद खदानों को नियमानुसार चालू करना चाहिए, रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए और जिले में कथित अवैध खनन एवं परिवहन पर पूरी तरह रोक लगानी चाहिए।

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