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उत्तर प्रदेश संघ में मनमानी का आरोप, प्रो. डी.पी. शुक्ला ने निष्पक्ष जांच और सरकारी निगरानी में चुनाव की मांग उठाई

जमशेदपुर: गोलमुरी स्थित क्युस्ट रेस्टोरेंट में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश संघ के संस्थापक सचिव प्रो. डी.पी. शुक्ला ने उत्तर प्रदेश संघ और मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के संचालन को लेकर वर्तमान नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश संघ की स्थापना वर्ष 1954 में स्वर्गीय महावीर सिंह के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के लोगों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से की गई थी। बाद में ट्रस्ट का गठन कर टाटा स्टील से लीज पर भूमि प्राप्त की गई और अनेक समाजसेवियों एवं शिक्षाविदों के सहयोग से मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल की स्थापना हुई।

प्रो. शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2020 में तत्कालीन कार्यकारिणी ने ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर शिक्षा पहुंचाने के उद्देश्य से गौरी गांव में भूमि खरीदी थी। भूमि की रजिस्ट्री, म्यूटेशन और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं तथा सरकारी सहयोग और ग्रामीणों की भागीदारी से बाउंड्री निर्माण का अधिकांश कार्य भी संपन्न हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना को आगे बढ़ाने के बजाय वर्तमान नेतृत्व ने बाधाएं उत्पन्न कीं, जिससे संस्था के विकास कार्य प्रभावित हुए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान कार्यकारिणी उत्तर प्रदेश संघ के संविधान के विपरीत कार्य कर रही है। उनके अनुसार संस्था की खरीदी गई भूमि को संपत्ति मानने से इनकार किया जा रहा है, जबकि सभी अभिलेख उसके पक्ष में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर सचिव के अधिकारों का भी उपयोग कर रहे हैं तथा संविधान के विरुद्ध समितियों का गठन और निर्णय लिए जा रहे हैं।

प्रो. शुक्ला ने आरोप लगाया कि उन्हें, मैनेजिंग ट्रस्टी विजय सिंह राणा तथा देवेश अवस्थी को सुनियोजित तरीके से निष्कासित किया गया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ गठित जांच समिति निष्पक्ष नहीं थी, क्योंकि उसमें ऐसे लोगों को शामिल किया गया था जो पहले उनके खिलाफ चुनाव लड़ चुके थे।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल परिसर में बाउंसर और असामाजिक तत्वों की तैनाती कर आजीवन सदस्यों के प्रवेश पर रोक लगाई जा रही है तथा उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि सीएनटी एक्ट का मुद्दा उठाकर चुनावी लाभ लेने का प्रयास किया गया, जबकि संस्था के विकास की दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं हुए।

वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रो. शुक्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश संघ के संविधान के अनुसार किसी भी वित्तीय भुगतान के लिए सचिव के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। इसके बावजूद सचिव के हस्ताक्षर के बिना करीब दो करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जो संविधान और वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा सरकारी स्तर पर जांच कराने की मांग की।

उन्होंने दावा किया कि उनके निष्कासन के विरोध में आजीवन सदस्यों ने वर्तमान नेतृत्व के खिलाफ भी कार्रवाई की है और इसकी सूचना संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दे दी गई है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान में प्रावधान नहीं होने के बावजूद केवल छह लोगों द्वारा नए महासचिव की नियुक्ति कर दी गई।

प्रो. शुक्ला ने कहा कि वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुका है। ऐसे में उसके बाद लिए गए सभी निर्णयों को निरस्त कर सरकार की निगरानी में निष्पक्ष चुनाव कराया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

प्रेस वार्ता में विजय सिंह राणा, देवेश अवस्थी, अनिल कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।

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