जमशेदपुर। ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा यूनिवर्सल पीस पैलेस, मरीन ड्राइव, सोनारी में आयोजित तीन दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा एवं राजयोग मेडिटेशन शिविर का प्रथम दिवस रविवार को उत्साह, आध्यात्मिक ऊर्जा और स्वास्थ्य जागरूकता के माहौल के बीच संपन्न हुआ। शिविर में झारखंड, कोल्हान प्रमंडल तथा पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर प्राकृतिक जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझा।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं ब्रह्माकुमार डॉ. श्याम गांगुली (ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय, माउंट आबू, राजस्थान) ने स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता के बीच गहरे संबंध को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया। उन्होंने कहा कि अधिकांश बीमारियों की शुरुआत शरीर से पहले मन में होती है। व्यक्ति के नकारात्मक विचार, भय, तनाव और भावनात्मक असंतुलन धीरे-धीरे शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं और कई प्रकार की बीमारियों का कारण बनते हैं।
उन्होंने बताया कि जब व्यक्ति भय या तनाव की स्थिति में होता है तो उसके शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं। इससे लार ग्रंथियों का स्राव कम हो जाता है, मुंह सूखने लगता है और पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भय स्वयं एक भावना है, जबकि शरीर में दिखाई देने वाले बदलाव उसके परिणाम हैं। यदि व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को सकारात्मक दिशा में नियंत्रित करना सीख ले तो अनेक शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बचा जा सकता है।
डॉ. गांगुली ने कहा कि राजयोग मेडिटेशन, सकारात्मक चिंतन, विज़ुअलाइजेशन और आत्मचेतना का नियमित अभ्यास मनुष्य की स्वाभाविक उपचार क्षमता (सेल्फ हीलिंग पावर) को सक्रिय करता है। उन्होंने कहा कि शरीर के साथ-साथ मन और आत्मा का संतुलन भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए उतना ही आवश्यक है। उनके व्याख्यान को उपस्थित प्रतिभागियों ने पूरे ध्यान और रुचि के साथ सुना।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ कोल्हान प्रमंडल की निदेशिका ब्रह्माकुमारी अंजू दीदी ने कहा कि पिछले लगभग एक वर्ष के दौरान यह चौथा प्राकृतिक चिकित्सा एवं राजयोग शिविर आयोजित किया गया है। पूर्व में आयोजित सभी शिविरों से लोगों को सकारात्मक परिणाम मिले हैं और उनके जीवन में स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति की दिशा में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ का उद्देश्य लोगों को प्रकृति के करीब लाना, सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा तनावमुक्त और रोगमुक्त समाज का निर्माण करना है।
शिविर के दौरान प्रतिभागियों को प्राकृतिक एवं पौष्टिक आहार, ताजे फलों का जूस तथा औषधीय काढ़ा भी उपलब्ध कराया गया। स्वास्थ्यवर्धक भोजन की सभी प्रतिभागियों ने सराहना की। पूरे आयोजन के दौरान आध्यात्मिक वातावरण, अनुशासित व्यवस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव प्रतिभागियों के चेहरों पर स्पष्ट दिखाई दिया।
आयोजकों के अनुसार तीन दिवसीय शिविर के आगामी सत्रों में प्राकृतिक चिकित्सा, योग, ध्यान, मानसिक स्वास्थ्य, जीवनशैली सुधार तथा आत्मिक सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मार्गदर्शन दिया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोग स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।

