Breaking
Tue. Jun 16th, 2026

गंभीर हालत में गर्भवती को स्कूटी से ले जाने का वीडियो वायरल, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

लोहरदगा: जिले के सदर अस्पताल से गंभीर अवस्था में रांची के रिम्स के लिए रेफर की गई एक गर्भवती महिला को स्लाइन चढ़ी हुई स्थिति में स्कूटी पर बैठाकर ले जाने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली, मरीजों की सुरक्षा और रेफरल प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार कैरो प्रखंड के तोड़ांग गांव की रहने वाली गर्भवती महिला को सोमवार की दोपहर करीब 3:30 बजे लोहरदगा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान ड्यूटी पर मौजूद महिला चिकित्सक ने पाया कि महिला की प्रसव तिथि बीते 17 दिन से अधिक समय गुजर चुका है, लेकिन प्रसव नहीं हुआ है। चिकित्सकों ने महिला की स्थिति को जोखिमपूर्ण मानते हुए बेहतर उपचार और विशेषज्ञ निगरानी के लिए शाम करीब 5 बजे रांची स्थित रिम्स रेफर कर दिया।

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक रेफर किए जाने के बाद परिजनों को 108 एंबुलेंस सेवा का उपयोग करने की सलाह दी गई थी, ताकि मरीज को सुरक्षित तरीके से उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाया जा सके। लेकिन परिजनों ने कथित तौर पर अस्पताल कर्मियों को बताया कि उनके पास स्वयं का वाहन उपलब्ध है और वे मरीज को अपने स्तर पर लेकर जाएंगे।

इसके बाद अस्पताल परिसर में जो दृश्य देखने को मिला, उसने सभी को हैरान कर दिया। गंभीर हालत में मौजूद गर्भवती महिला को हाथ में स्लाइन लगी अवस्था में एक स्कूटी पर बैठाकर अस्पताल से बाहर ले जाया गया। बताया जा रहा है कि स्कूटी पर तीन लोग सवार थे और महिला को बीच में बैठाया गया था। हैरानी की बात यह भी बताई जा रही है कि वाहन चला रहा व्यक्ति महिला का करीबी रिश्तेदार नहीं था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर अवस्था में रेफर मरीज को इस तरह दोपहिया वाहन से ले जाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। रास्ते में किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय जटिलता होने पर मरीज और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है। ऐसे मामलों में एंबुलेंस और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में मरीज को स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

घटना सामने आने के बाद अस्पताल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि मरीज की स्थिति गंभीर थी तो अस्पताल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि उसे सुरक्षित माध्यम से ही रेफरल केंद्र भेजा जाए। वहीं यह चर्चा भी तेज है कि महिला को रिम्स ले जाने के बजाय शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने घटना की जानकारी ली है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज को रेफर करते समय एंबुलेंस सेवा का सुझाव दिया गया था, लेकिन परिजनों ने निजी वाहन होने की बात कही थी। अब पूरे मामले की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर गंभीर मरीज को इस तरह स्कूटी पर ले जाने की नौबत क्यों आई और इसमें किस स्तर पर लापरवाही हुई।

घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में रेफरल मरीजों की सुरक्षा, निगरानी और आपातकालीन परिवहन व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

Related Post