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Fri. May 15th, 2026

चाईबासा में बाल-संवेदनशील पुलिसिंग पर कार्यशाला, पुलिस अधिकारियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिला पुलिस की ओर से शुक्रवार को पुलिस लाइन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में बाल संरक्षण और बाल-संवेदनशील पुलिसिंग को लेकर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विशेष किशोर पुलिस इकाइयों (एसजेपीयू) को मजबूत बनाना और बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली को अधिक संवेदनशील, प्रभावी और कानूनसम्मत बनाना था।

यह कार्यक्रम पश्चिम सिंहभूम पुलिस विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग तथा सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (सीसीआर), नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल) के तकनीकी सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से आए 39 बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों (सीडब्ल्यूपीओ) ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम और पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों के सही दस्तावेजीकरण और बाल-अनुकूल प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संवेदनशील पुलिसिंग से पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने में मदद मिलती है और उनके अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

पुलिस लाइन के मेजर मंसूर गोप ने बताया कि यूनिसेफ और सीसीआर, एनयूएसआरएल के सहयोग से सात चरणों में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार को इसका पांचवां चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को बच्चों से जुड़े मामलों के प्रति अधिक जागरूक और प्रशिक्षित बनाना है।

कार्यक्रम की शुरुआत अनिरुद्ध सरकार के स्वागत भाषण और प्रशिक्षण-पूर्व मूल्यांकन प्रक्रिया से हुई। तकनीकी सत्र के दौरान यूनिसेफ के बाल संरक्षण अधिकारी गौरव कुमार ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 और झारखंड किशोर न्याय नियम 2017 के तहत बाल-संवेदनशील पुलिसिंग की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बाल भिक्षावृत्ति, बाल तस्करी, मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में बच्चों के इस्तेमाल और अन्य अपराधों की पहचान तथा उनसे निपटने की कानूनी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की।

प्रशिक्षण के दौरान बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों की भूमिका, पुलिस थानों में बच्चों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई और प्रोबेशन अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। भूमिका-निर्वाह, केस स्टडी और व्यवहारिक अभ्यास के जरिए अधिकारियों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्रवाई की प्रक्रिया समझाई गई।

कार्यशाला में बाल विवाह, लैंगिक शोषण और विधि से संघर्षरत बच्चों से जुड़े मामलों पर आधारित केस स्टडी प्रस्तुत की गईं। बाल कल्याण समिति के सदस्य मोहम्मद समीम ने प्रतिभागियों के क्षमता आकलन और भविष्य की रणनीति को लेकर समूह चर्चा कराई। वहीं अनिरुद्ध सरकार ने पालक देखभाल और आफ्टर केयर योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

कार्यक्रम में पीसीआई इंडिया के सलाहकार हिमांशु जेना भी मौजूद रहे। उन्होंने बाल विवाह उन्मूलन और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। अंत में मंसूर गोप ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

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