जमशेदपुर। “सत्संग और कथा के माध्यम से ही मनुष्य अपने जीवन में सच्चा ज्ञान और भक्ति का प्रकाश प्राप्त कर सकता है।” यह बातें शुक्रवार को लक्ष्मीनगर स्थित हनुमान मंदिर में आयोजित सात दिवसीय पार्थिव पूजन यज्ञ सह शिव कथा के छठवें दिन आचार्य राजकुमार मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही।
कथा के दौरान आचार्य मिश्रा ने शिव पुराण में वर्णित जलंधर और वृंदा के प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि जब शिव अंश जलंधर और भगवान सदाशिव के बीच भीषण युद्ध चल रहा था, तब माता पार्वती के आदेश पर भगवान विष्णु ने ऋषि का वेश धारण कर जलंधर के उद्यान में प्रवेश किया। उसी समय जलंधर की पतिव्रता पत्नी वृंदा को अशुभ स्वप्न आया, जिससे व्याकुल होकर वह अपनी सखियों के साथ उद्यान पहुंची।
उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु ने लीला स्वरूप वृंदा के साथ छल किया, जिससे उसका पतिव्रत धर्म भंग हो गया। इसके परिणामस्वरूप जलंधर की शक्ति समाप्त हो गई और भगवान शिव द्वारा उसका वध संभव हुआ। इस घटना से आहत वृंदा ने भगवान विष्णु को पत्थर बनने का शाप दिया, जिससे वे शालिग्राम स्वरूप में प्रतिष्ठित हुए, जबकि वृंदा तुलसी के रूप में पूजनीय बन गईं।
आचार्य मिश्रा ने कहा कि यह प्रसंग केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला संदेश है। जिस प्रकार मधुमक्खी विभिन्न पुष्पों से रस एकत्र कर मधु बनाती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी सत्संग से अच्छे विचार ग्रहण कर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।
मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण के साथ यज्ञ में भाग लेकर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम को सफल बनाने में युवक संघ दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष संजय सिंह, उपाध्यक्ष सतीश कुमार, महासचिव संजय कुमार सहित संजय कुशवाहा, विजय कुमार, राकेश सिंह ‘बुलबुल’, जय चौधरी, सागर, साहिल और अमन समेत अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

