जमशेदपुर। देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान एक्सएलआरआइ ने ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। नाबार्ड के सहयोग से एक्सएलआरआइ में रूरल बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर की शुरुआत की गई है, जो पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के उद्यमियों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगा।
एक्सएलआरआइ जमशेदपुर ने ग्रामीण विकास और समावेशी आर्थिक परिवर्तन के उद्देश्य से रूरल बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना की घोषणा की है। यह केंद्र “एक्सएलआरआइ सेंटर फॉर इनोवेशन, टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप” यानी एक्ससीआइटीइ के नाम से संचालित होगा। इसकी स्थापना नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) से प्राप्त अनुदान के माध्यम से की गई है। केंद्र का मुख्य उद्देश्य कृषि व्यवसाय और इससे जुड़े गैर-कृषि क्षेत्रों में नवाचार आधारित, शुरुआती चरण के उद्यमों को सहयोग प्रदान करना है, ताकि रोजगार सृजन, सतत विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सके।
एक्ससीआइटीइ बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के आठ राज्यों सहित कुल 12 राज्यों के उद्यमियों को समर्थन देगा। ये वे क्षेत्र हैं जहां संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद संगठित उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र की कमी रही है। यह केंद्र ऐसे नवाचारी विचारों को पहचान कर उन्हें संरचित मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और बाजार से जोड़ने का कार्य करेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर टिकाऊ उद्यम विकसित हो सकें।
इस परियोजना को लेकर शुक्रवार को एक्सएलआरआइ और नाबार्ड के बीच औपचारिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर एक्सएलआरआइ के निदेशक फादर एस. जॉर्ज एसजे ने कहा कि एक्ससीआइटीइ की शुरुआत संस्थान के मूल मंत्र ‘एक्सीलेंस विद इंटीग्रिटी’ को व्यवहार में उतारने की दिशा में अहम कदम है, जिसका लक्ष्य शहरी सीमाओं से बाहर जाकर वास्तविक सामाजिक प्रभाव पैदा करना है। इन्क्यूबेशन सेंटर के फैकल्टी इंचार्ज प्रो. सौरव स्नेहव्रत ने इसे देश के अग्रणी ग्रामीण बिजनेस इन्क्यूबेशन केंद्रों में शामिल करने की महत्वाकांक्षा जताई। वहीं सह-नेतृत्वकर्ता प्रो. टाटा एल. रघु राम ने बताया कि नाबार्ड के सहयोग से यहां मेंटरशिप, बिजनेस डेवलपमेंट सपोर्ट, बाजार तक पहुंच और वित्तीय संसाधनों से जोड़ने की मजबूत व्यवस्था विकसित की जाएगी। एक्सएलआरआइ और नाबार्ड की संयुक्त परिकल्पना है कि एक्ससीआइटीइ पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में ग्रामीण उद्यमिता का एक सशक्त केंद्र बनकर स्थानीय आजीविका और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा।

