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Wed. Mar 4th, 2026

टंडवा में सैकड़ों हाइवा मालिकों की हड़ताल से कोयला परिवहन ठप, पांच दिनों से बंद ढुलाई से सरकार को बड़ी राजस्व क्षति

चतरा। जिले के टंडवा क्षेत्र में कोयला परिवहन करने वाले लगभग 1500 हाइवा मालिकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल पांचवें दिन भी समाप्त नहीं हुई। हड़ताल की वजह टंडवा थाना प्रभारी पर लगाए गए अवैध वसूली के आरोप बताए जा रहे हैं। परिवहन ठप होने से कोयला परियोजनाओं पर गंभीर असर पड़ा है और राज्य सरकार को प्रतिदिन करीब एक करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है। हड़ताल 12 नवंबर से जारी है और लगातार प्रभावित हो रही ढुलाई को लेकर उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र में चिंता बढ़ती जा रही है।

हाइवा मालिकों का कहना है कि थाना प्रभारी रात के समय ट्रकों को रोककर खराब या अतिरिक्त लाइट, तिरपाल की स्थिति, अथवा स्पीड मीटर छेड़छाड़ जैसे मनगढ़ंत आरोप लगाते हैं और इन आधारों पर प्रति गाड़ी पांच से दस हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। मालिकों का आरोप है कि लगातार दबाव, धमकी और जबरन जुर्माने के कारण परिवहनकर्ताओं के सामने हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। इसके साथ ही टंडवा–सिमरिया मार्ग के खधैया क्षेत्र में मौखिक रूप से लागू की गई नो-एंट्री व्यवस्था ने ट्रांसपोर्टरों का रोष और बढ़ा दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन के रवैये से नाराजगी हड़ताल का मुख्य कारण बन चुकी है।

हाइवा मालिकों की विभिन्न यूनियनों—सिमरिया, टंडवा, केरेडारी, कटकमसांडी और आम्रपाली हाइवा ओनर्स एसोसिएशन—ने रविवार को केरेडारी के चुंदरु धाम मैदान में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इसमें हड़ताल की रणनीति पर चर्चा के साथ मुख्यमंत्री को भेजे जाने वाले ज्ञापन का प्रारूप तैयार किया गया, जिसे सोमवार को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। यूनियनों ने आरोपों की उच्चस्तरीय जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।

हड़ताल से कोयला परियोजनाओं पर व्यापक असर पड़ा है। प्रतिदिन लगभग 60,000 टन कोयले की ढुलाई बंद हो जाने से चट्‌टी बारियातू, कटकमसांडी, डकरा, केडी माइंस पांडु, टोरी, आम्रपाली, आरसीआर और मगध परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। उत्पादन और डिस्पैच बाधित होने से ऊर्जा क्षेत्र भी दबाव में आ गया है।

परिस्थिति का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो एनटीपीसी को कोयले की आपूर्ति में कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाएगी। उद्योगों के साथ-साथ राज्य की बिजली व्यवस्था पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। स्थिति पर स्थानीय प्रशासन और सरकार की निगाहें बनी हुई हैं, लेकिन बातचीत के सफल न होने तक कोयला परिवहन बहाल होता नहीं दिख रहा।

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