नई दिल्ली। आईआरसीटीसी घोटाला मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित 14 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए। अदालत ने माना है कि रेलवे के बीएनआर रांची और पुरी होटलों के रखरखाव के ठेकों में गंभीर अनियमितताएं हुईं और इनसे सीधे तौर पर लालू यादव के परिवार को लाभ पहुंचाया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने जब लालू यादव से पूछा कि क्या वे आरोप स्वीकार करते हैं, तो उन्होंने, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वे मुकदमे का सामना करेंगे। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सीबीआई ने आरोपों से संबंधित साक्ष्यों की एक मजबूत श्रृंखला पेश की है, जिससे प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि इस योजना के तहत लालू परिवार को भूमि और अनुचित लाभ दिलाए गए।
सीबीआई की जांच में सामने आया था कि 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने आईआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव का ठेका बिहार की निजी कंपनी सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया। जांच एजेंसी के अनुसार, निविदा प्रक्रिया को इस कंपनी के पक्ष में मोड़ा गया और इसके बदले पटना में तीन एकड़ जमीन बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर लालू परिवार या उनसे जुड़ी कंपनियों को हस्तांतरित की गई।
सीबीआई ने इस मामले में 7 जुलाई 2017 को प्राथमिकी दर्ज की थी और इसके बाद पटना, नई दिल्ली, रांची और गुरुग्राम में 12 ठिकानों पर छापेमारी की थी। चार्जशीट में बताया गया कि यह सौदा डिलाइट मार्केटिंग कंपनी (जो बाद में लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से जानी गई) के माध्यम से पूरा किया गया। साथ ही होटल कारोबारी विजय कोचर और विनय कोचर, आईआरसीटीसी के तत्कालीन अधिकारी वी.के. अस्थाना और आर.के. गोयल समेत अन्य लोगों को भी अभियुक्त बनाया गया है।
अदालत ने कहा कि लालू प्रसाद यादव को इन होटलों के हस्तांतरण की पूरी जानकारी थी और नियमों में जानबूझकर ऐसे बदलाव किए गए ताकि ठेका सुजाता होटल्स को मिल सके। कोर्ट ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और 13(1)(d) के तहत आरोप तय किए, जबकि राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव व्हीलचेयर पर अदालत पहुंचे। कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में समर्थक और मीडिया कर्मी मौजूद थे। इस आदेश के साथ अब मामले का ट्रायल शुरू होगा, जिससे लालू परिवार की कानूनी मुश्किलें बढ़ने की संभावना है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह फैसला अहम माना जा रहा है, क्योंकि बिहार में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बनना शुरू हो गया है। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 13 अक्टूबर 2025 सुबह 10 बजे तय की है और सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

