पश्चिम सभ्यता के चपेट में आज हम धीरे धीरे हमारी भाषा,संस्कृति, सभ्यता और परंपरा को भूलते जा रहे हैं और छोड़ते जा रहे जो बहुत ही दुर्भाग्य और चिंता जनक है।अपनी भाषा,संस्कृति और परंपरा ही हमारा पहचान है जिसको हमें बचा के रखना चाहिए।पहला बैशाख बंगभाषियो के लिए बंगला नव वर्ष है जो पहले बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता था।उसदिन सभी दुकानदारों ने पूजा पाठ करके नया खाता खोलते थे।घर घर में पूजा पाठ और मिठाई वितरण किया जाता था।इस परंपरा को ध्यान में रखते हुए आगामी 15 अप्रैल 2025 मंगलवार को अपराह्न 5 बजे माताजी आश्रम हाता में बंगला नववर्ष अर्थात पयला बैशाख 1432 का पालन किया जायेगा। यह जानकारी माताजी आश्रम की ओर से सुनील कुमार दे ने दी।इस अबसर पर वर्ष वरण, ठाकुर जी की संध्या आरती,भक्तिगीति,रामकृष्ण कथामृत पाठ, नाम संकीर्तन,प्रसाद वितरण आदि कार्यक्रम होंगे।माताजी आश्रम की ओर से सभी भक्तजनों को बंगला नव वर्ष की मिलन समारोह में सादर आमंत्रण दिया जा रहा है।