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चंदवा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ दो एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। 1.5 लाख आबादी वाला क्षेत्र

30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है चंदवा में

चंदवा संवाददाता मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट

**चंदवा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ दो एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। 1.5 लाख आबादी वाला क्षेत्र*

 

 

 

चंदवा। चंदवा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल का अपग्रेडेशन करते हुए करोड़ों रुपए से अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया है। अस्पताल में चिकित्सा संसाधनों की कमी नहीं है पर टेक्नीशियन के कमी से सारे उपकरणों को जंग लग रहा है।

अस्पताल में है वार्ड का अभाव,

महिला पुरुष मरीज को एमटीसी को मिलाकर कुल 30 बेड अस्पताल के वार्ड में उपलब्ध है। प्रसूति महिलाओं के लिए अलग वार्ड है पर सामान्य मरीज के महिलाओं और पुरुषों को एक ही वार्ड में रख इलाज किया जाता है।

अस्पताल के कर्मियों की बात करें तो सभी कर्मी अपने कार्य का निर्वहन करते हैं।

चिकित्सक की बात करें तो अस्पताल के हिसाब से डॉक्टरों की संख्या 8से 10 होनी चाहिए थी परंतु दो ही चिकित्सक उपलब्ध है एक डॉक्टर तो अस्पताल के प्रभारी है वही दूसरी मेडिकल ऑफिसर डॉ नीलिमा कुमारी है। फिर भी सामान्य मरीजों के लिए चिकित्सक उपलब्ध रहते हैं।

महिला-पुरुष के लिए अलग अलग वार्ड उपलब्ध नही है।

अस्पताल की साफ-सफाई भी देखने योग्य रहता।

सीएचसी प्रभारी डॉक्टर नंद कुमार पांडे का कहना है की इतने बड़े हॉस्पिटल में मात्र दो डॉक्टर के सहारे हम लोग मरीजों की सेवा करते है। वही दोनों डॉक्टर 12- 12 घंटे प्रतिदिन सेवा दे रहे हैं। आला अधिकारियों को कई एक बार पत्राचार किया गया है पर कोई सुनवाई नहीं हो पाती है हम लोग भी मनुष्य हैं पर हम लोगों को आराम नहीं मिल पाता ऐसा लगता है फिर नौकरी छोड़ दें। बताते चले कि चंदवा में चार सड़क है। सभी सड़क पर दुर्घटना हमेशा होती रहती है। नर्स और ड्रेस फोर्थ ग्रेड सफाई कर्मचारी कार्यालय कर्मचारी का घोर अभाव है चंदवा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भगवान भरोसे चल रहा है क्योंकि चंदवा की आबादी डेढ़ लाख बताई जा रही है कई क्षेत्र चंदवा के ऐसे भी हैं जिससे पहुंच पाना कुछ घंटे में बड़ी मुश्किल होती है उसके बावजूद भी हम लोग मरीजों को संतुष्टि प्रदान करें हम लोग के पास जो भी सुविधा है उस पर चंदवा के लोगों को उचित इलाज करते हैं रविवार छोड़कर सभी दिन ओपीडी में 100 मरीज से ऊपर देखा जाता है ऐसे में एक सपोर्टिंग डॉक्टर आरबीएसके के हैं डॉ तरुण लकड़ा है। इमरजेंसी में कभी-कभी उनसे काम ले लेते हैं वहीं देखा जाता है कि सरकार तो एंबुलेंस दे देती है परंतु एंबुलेंस में ड्राइवर और खर्च की व्यवस्था नहीं करती है कई बार हम लोगों को पब्लिक के उग्रता का सामना करना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड की भी व्यवस्था नहीं है जिसको लेकर के लोग कई तरह के हमेशा सवाल उठाते रहते हैं समाजसेवियों द्वारा लातेहार के सीएस तथा उपायुक्त को भी पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया गया है परंतु आज तक अल्ट्रासाउंड की मशीन रखी हुई है जो धूल खा रही है ईसीजी की मशीन भी है उसका भी वही हाल है बताते चलें कि एक्सरे मशीन कार्य करती है परंतु हमेशा बिजली नहीं रहने के कारण मरीजों को लौटा दिया जाता है और यह कह दिया जाता है कि जनरेटर में तेल के अभाव में आपका काम नहीं हो रहा है बिजली आएगी तो एक्सरे कर दिया जाएगा मायूस होकर मरीज किसी प्राइवेट क्लीनिक में जाने को मजबूर हो जाते हैं।

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