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जान देंगे जमीन नहीं देंगे के नारों से गुंजा टूटूवा पानी का इलाका।सभा को संबोधित किए किसान नेता राकेश टिकैत।

जान देंगे जमीन नहीं देंगे के नारों से गुंजा टूटूवा पानी का इलाका।सभा को संबोधित किए किसान नेता राकेश टिकैत।

मोहम्मद शहजाद आलम की रिपोर्ट।

छोटानागपुर की रानी कहे जाने वाले नेतरहाट से मात्र 8 किलोमीटर दूर टुटवापानी नामक स्थान में 1994 से एक लम्बा संघर्षमय सत्याग्रह जारी है.प्रकृति की सुंदर वादियों में 1994 से यहां एक गूंज सुनाई पड़ रही है और वह गूंज है ‘जान देंगे ज़मीन नहीं’ आरंभ में यह गूंज एक सामान्य नारा जैसी सुनाई पड़ती है, लेकिन इस नारे के पीछे तीन दशक लम्बा संघर्षमय इतिहास छुपा है. नेतरहाट की मनोरम वादियों में प्रत्येक वर्ष 22 एवं 23 मार्च को ‘आवाज दो हम एक है’ एवं ‘जल जंगल ज़मीन हमारा है’ के अनुगुंजन से भी पूरी वादी सरोबार हो जाती है. 1994 ई. में लाखों लोगों ने अपने जल जंगल ज़मीन की रक्षा के लिए सत्याग्रह में भारी संख्या में भाग लिया था,और यह परंपरा निवर्तमान आज तक जारी है।

महुआडांड़ नेतरहाट के पठारी क्षेत्र में स्थित टूटूआ पानी का इलाका मंगलवार को जान देंगे जमीन नहीं देंगे,जल जंगल जमीन हमारा है आवाज दो हम एक है’के नारे से गूंज उठा। लातेहार और गुमला जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए हजारों प्रदर्शनकारियों ने एक साथ फील्ड फायरिंग रेंज का विरोध करने यहां पहुंचे हुए हैं।सभी ने एक स्वर में कहा कि इस प्रस्ताव को सरकार को वापस लेना होगा।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अनिल मनोहर जेरोम जेराल्ड समेत अन्य स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले 29 वर्षों से वे लोग इस प्रस्ताव को रद्द करने के लिए लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उनका आंदोलन तब तक चलेगा जब तक यह प्रस्ताव पूरी तरह रद्द ना हो जाए। वही इस कार्यक्रम को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे जहां जन संघर्ष समिति के सदस्य व स्थानीय लोगों के द्वारा पारंपरिक रीति रिवाज के साथ जोरदार स्वागत किया गया।

जिसके उपरांत श्री टिकैत नेतरहाट के टुटुवापानी में नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज विरोधी जनसंघर्ष समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय विरोध एवं संकल्प दिवस को संबोधित किया।इस दौरान उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि जहां भी गरीब, मजदूर और किसानों का आंदोलन होगा, वहां मेरा समर्थन रहेगा। कहा कि कोई भी आंदोलन आदमी से नहीं, बल्कि विचारधारा से चलता है। ऐसे आंदोलनों में युवाओं को आगे आना होगा।उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 विचारों के आदान-प्रदान का साल है. देश में गरीब, मजदूर और किसान जहां भी आंदोलन करेंगे, मेरा उनको भरपूर समर्थन मिलेगा. किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते हैं, क्योंकि यह उनका अधिकार है. सरकार जमीन लेने की बजाए शिक्षा देने का काम करे, तो समाज एवं देश की प्रगति होगी। कहा कि नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज से विस्थापित होनेवाले लातेहार और गुमला जिले के 245 गांव के लोग कहां जाएंगे यह एक गंभीर विषय है।

श्री टिकैत ने आगे कहा कि नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज निर्माण कि विरोध की शुरुआत लगभग 3 दशक पूर्व हुई थी। आंदोलन की शुरुआत करने वाले कई लोग आज इस दुनिया में नहीं होंगे। बावजूद भी सभी के लगन सहयोग व आपसी मेल मिलाप यह आंदोलन मजबूती से चल रहा है। दिल्ली में एक आंदोलन शुरू हुआ था, जो 13 महीने तक चला।इस आंदोलन को पूरे देश का समर्थन मिला।जिसके बाद हमारी जीत हुईं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माले विधायक विनोद सिंह ने कहा कि गत 20 दिसंबर को विधानसभा में मैंने सरकार से पूछा था कि बिहार सरकार की अधिसूचना संख्या 1862 दिनांक 20.08.1999 के अनुसार नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज का उक्त क्षेत्र के ग्रामीण विरोध कर रहे हैं।

साथ ही पूछा था कि यह एक इको सेंसेटिव क्षेत्र है और 11 मई, 2022 को राज्य सरकार फिल्ड फायरिंग रेंज की समयावधि विस्तार पर रोक लगाने का विचार रखती है। इस सवाल पर सरकार ने बताया कि इस संबंध में विभाग को अब तक कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है. कहा कि फायरिंग रेंज की समयावधि विस्तार पर सरकार जब तक रोक नहीं लगाती तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा. इधर, इस सभा में किसान नेता राकेश टिकैत और विधायक विनोद सिंह के अलावा समाजसेवी दयामनी बारला समेत कई आदिवासी नेता ने अपनी बातें रखीं। कार्यक्रम स्थल पर हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे.

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