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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो नें किए करवाई, लिपिक कृष्णकांत बारला दस हजार घूंस लेते गिरफ्तार* *स्पष्टीकरण मैनेज करने के नाम पर बारेसांढ़ एमपीडब्लू से माँगा गया था रिश्वत

*भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो नें किए करवाई, लिपिक कृष्णकांत बारला दस हजार घूंस लेते गिरफ्तार*

 

*स्पष्टीकरण मैनेज करने के नाम पर बारेसांढ़ एमपीडब्लू से माँगा गया था रिश्वत*

 

*गारू संवाददाता उमेश यादव की रिपोर्ट

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) रांची की टीम ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई कर एक लिपिक को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। स्वास्थ्य निदेशालय कार्यालय नामकुम में पोस्टेड लिपिक कृष्णकांत बारला को टीम नें दस हजार लेते पकड़ा। बताया जा रहा कि लिपिक ने यह रिश्वत बारेसांढ़ एमपीडब्लू स्पष्टीकरण को मैनेज करने के एवज में मांगा गया था। एसीबी के अनुसार संतोष कुमार के द्वारा शिकायत किया गया था तथा जांचोपरांत मामला सही पाया गया।

पुलिस निरीक्षक स्तर के पदाधिकारी ने जांच के बाद भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम-2018 के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दिए हैं।

 

*क्या है पूरा मामला*

 

गारू प्रखंड के चार ग्राम प्रधान सुरेश उरांव (करवाई), जितेंद्र उरांव (अरमु), राजेश्वर उरांव (पूर्णी हेसाग) तथा राजू उरांव नें स्वास्थ्य मंत्री को आवेदन देकर एमपीडब्लू संतोष कुमार के ऊपर डॉ भरत भूषण भगत के बहकावे पर धांधली एवं अनियमितता, तथा असामाजिक संगठनों के साथ गलत सांठगांठ रखने का आरोप लगाया था। उसके बात माननीय स्वास्थ्य मंत्री के सचिव आशिफ एकराम नें अग्रेतर जाँच कर करवाई हेतू निदेशक प्रमुख (स्वास्थ्य विभाग नामकुम रांची) को पत्र लिखा। उसी आवेदन के आधार पर संतोष कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की गई थी। उक्त स्पष्टीकरण को मैनेज करने के एवज में लिपिक कृष्णकांत बारला द्वारा दस हजार रिश्वत की मांग की गई थी।

बताते चलें की कुछ महीने पहले ही रेफरल अस्पताल गारू के प्रभारी से डॉ भरत भूषण भगत को मुक्त कर डॉ अरविंद कुमार को नया प्रभारी बनाया गया है। भरत भूषण के प्रभारी रहते अस्पताल से कई मामले पर लापरवाही का आरोप भी लगा। उसके बाद अंततः सिविल सर्जन नें उन्हें प्रभारी पद से हटा दिया।

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