Sun. Jul 21st, 2024

जश्ने ईद मिलाद उल नबी के मौके पर सजी गलियां,की गई मिलाद खानी व लंगरखानी, साथ ही देश में अमन चैन के लिए कि गई दुआ।

जश्ने ईद मिलादुन्नबी के मौके पर महुआडांड़ के गलियों को सजाया गया था। साथ ही महुआडांड़,अम्वाटोली गुरुगुटोली, मस्जिद जामिया नूरिया जिया उल इस्लाम तथा मस्जिदे गौसिया में लंगर खानी का इंतजाम किया गया था। इस दरमियान जामिया नूरिया जिया उल इस्लाम, तथा मस्जिदे गौसिया में ईद मिलादुन्नबी को लेकर मिलादखानी का भी इंतजाम किया गया था। इस दरमियान उपस्थित लोगों को जामिया नूरिया जियाउल इस्लाम के मुफ्ती सऊद आलम मिस्बाही के द्वारा हजरत मोहम्मद के जीवनी के बारे में लोगों को विस्तृत रूप से जानकारी दी गई। उन्होंने कहा की हजरत मोहम्मद सिर्फ हमारे ही नहीं है यह सभी के हैं। आज इनके ही सदके पूरे दुनिया में इस्लाम का परचम लहरा रहा है सारे दुनिया में इस्लाम फैला हुआ है। इस्लाम में अल्लाह तबारक व ताला के बाद हजरत मोहम्मद का नाम आता है। इस्लाम की सर बुलंदी के लिए इन्होंने अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। हम सभी को हजरत मोहम्मद के बताए रास्ते पर चलना चाहिए और उन्हीं के रास्ते पर चलकर कामयाबी हासिल किया जा सकता है।

एक वाक्य बयान करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार मक्का की गलियों में यह शोर हो गया कि कोई मोहम्मद नाम का आदमी आया है जो लोगों को अपने बातों में मोह लेता है इस बात की खबर एक बुढ़िया को मिलती है तो वह घर छोड़कर जाने लगती है वह अपने साथ एक गट्ठर लिए होती है। रास्ते में हजरत मोहम्मद मिल जाते हैं और उस बुढ़िया से पूछते हैं की मां आपको कहां जाना है लाइए मैं आप की गठरी उठाकर आपको जहां जाना है वहां तक पहुंचा देता हूं और हजरत मोहम्मद उस बुढ़िया की गठरी को उठाकर उस मुकाम पर पहुंचा देते हैं जहां उस बुढ़िया को जाना था। जिसके बाद वह बुढ़िया उससे कहती है बेटा मैं अपना घर छोड़कर इसलिए इधर आई हूं क्योंकि एक मोहम्मद नाम का आदमी है उससे जो भी बात करता है वह उसी का होकर रह जाता है और उसके बताए हुए रास्ते पर चलने लगता है इसी के डर से मैं वहां से भाग निकली हूं। बेटा तूने इतना मेरा बोझ उठाया और मुझे यहां तक लाए तुम बताओ कि तुम कौन हो। तब हजरत मोहम्मद अपना नाम बताते हैं और कहते हैं किए बूढ़ी मां जिससे वजह से तो दूर भाग रही और सारे रास्ते जिसके बारे में हमें बताते आई वही शख्स मैं हूं और मेरा ही नाम मोहम्मद है। इतना सब कुछ और प्यार देखकर बुढ़िया उसके तरफ देखती है और कहती है बेटा मुझे ऐसा ही बताया गया था लेकिन तुम ऐसे हो यह मैंने तुमसे मिलकर जाना अब मैं कहीं नहीं जाऊंगी आज से मैं तुम्हारे बताए हुए रास्ते पर ही चलूंगी। आगे मुफ्ती सउद आलम मिस्बाही कहते हैं कि आज दुनिया में इस्लाम को बदनाम करने का काम किया जाता है जबकि इस्लाम अमन चैन भाईचारे का नाम है। इस्लाम में किसी तरह का छुआछूत नीच ऊंच और ना ही कोई बड़ा छोटा होता है। जब मस्जिद में नमाज पढ़ाई जाती है तो एक ही लाइन में चाहे वो राजा हो या फकीर सभी खड़े होते हैं। इस्लाम में सभी को बराबरी का हक है। आज रबी उल अव्वल का दिन है आज के ही दिन गरीबों के सहारा अल्लाह का प्यारा, इंसानों में सबसे प्यारा अल्लाह ने जिसे अपने नूर से पैदा किया है उनका आज पैदाइश का दिन है और इस दिन सारी दुनिया के लोग खुशी मनाते हैं आज के दिन अच्छे अच्छे कपड़े पहन कर मस्जिद में जाते हैं। और अच्छे पकवान पका कर गरीबों और मिस्कीनो में में बांटते हैं खैरात करते हैं सदका निकालते हैं। आगे उन्होंने कहा हजरत मोहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलकर ही अपने ज़िन्दगी कामयाब बनाया जा सकता है। जिसके बाद मुफ्ती सईद आलम मिस्बाही के द्वारा दुआ किया गय कि जो भी लोग बीमार हैं जो गरीब हैं उन सभी के लिए दुआ की गई साथ ही अपने देश के अमन चैन व शांति के लिए भी दुआ किया गया। फिर मस्जिद में ही सलाम पढ़ी गई और मिलाद कर सभी के बीच सिरनी बांटा गया।कार्यक्रम को सफल बनाने में सदर मो इरशाद सेक्रेटरी इमरान खान फहीम खान खजांची हसन इमाम खुर्शीद आलम आजाद अहमद ह्युम अंसारी आदि लोगों का सराहनीय योगदान रहा।वही इस दौरान विधी व्यवस्था संधारण को लेकर एसडीपीओ राजेश कुजूर के निर्देशानुसार महुआडांड़ थाना प्रभारी आशुतोष यादव के नेतृत्व मे पुलिस कर्मी सभी चौक चौराहों पर सक्रिय दिखे।

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