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Mon. Jan 12th, 2026

हाशिए पर हैं पत्रकार,सरकारों के पास नहीं है ठोस नीति-बंटी जयसवाल

*हाशिए पर हैं पत्रकार,सरकारों के पास नहीं है ठोस नीति-बंटी जयसवाल*

AISMJWA के नवमनोनित झारखंड के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बंटी जयसवाल ने कहा है कि “पत्रकार हमेशा से ही हाशिए पर रहा है इसका मूल कारण है कि पत्रकारों के हित के लिए किसी भी सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है.”उन्होंने कहा कि पत्रकार शुरुआती दौर से ही इस्तेमाल की वस्तु बनकर रह गए हैं,पत्रकारिता एक जज्बा और जुनून है जिसका लाभ समाज को जरूर मिलता है लेकिन इसका लाभ उसके आश्रित को नहीं मिलता.

एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहम्मद सईद ने कहा कि दानिश की शहादत से एसोसिएशन गमगीन है.वे बोले कोरोना में हमारे 36 शहीद पत्रकारों की झारखंड सरकार ने अब तक सुध नहीं ली है,यह बहुत ही दुखद है. वह बोले पत्रकारों की शहादत को सलामी के लिए उनके आश्रितों की सुध लेना सबसे बड़ी पहल होगी.

एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव सुनील पांडे ने कहा है कि कोरोना में देश में लगभग 500 पत्रकार शहीद हुए हैं लेकिन आज उनके आश्रितों की सुध लेने वाला कोई नहीं है.सरकारों को पत्रकारों के लिए ठोस नीति बनाने की जरूरत है.

एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव जितेंद्र ज्योतिषी ने कहा कि पूरे देश में सबसे पहले पत्रकार सुरक्षा कानून लागू होना चाहिए क्योंकि जब तक पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नहीं होगा तब तक पत्रकारों की सुरक्षा और संवर्धन का कार्य बाधित ही रहेगा.

एसोसिएशन के प्रदेश सचिव राघव सिंह ने कहा कि पत्रकार कलम का सिपाही होता है फिर भी वह देश में आर्थिक रूप से वह सबसे शोषित ही कहलाता है.

एसोसिएशन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष,उपाध्यक्ष,सचिव और महासचिवों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि दानिश सिद्दीकी की शहादत जैसे दर्जनों उदाहरण देश में केवल श्रद्धांजलि तक ही सीमित रह गए हैं.इसके लिए पत्रकार समाज ही दोषी है. उन्होंने कहा कि हम एसोसिएशन की ओर से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हैं और दुख की इस घड़ी में उसके परिवार को सरकारी मदद की भी मांग करते हैं.

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