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बीमा अधिकारियों – कर्मचारियों ने  किया 18 मार्च को एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल

एलआईसी का आईपीओ के माध्यम से विनिवेशीकरण करना देश के लिए हानिकारक है ---धर्म प्रकाश

गिरिडीह

भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों ने भारतीय जीवन बीमा निगम को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने के निर्णय को तत्काल प्रभाव से रद्द करने, LIC की IPO का विरोध ,बीमा उद्योग में विदेशी निवेश 49 से बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को रद्द करने, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण न करके उन्हें और अधिक सुदृढ़ करने तथा 1 अगस्त 2017 से लम्बित वेतन बढ़ोतरी समझौते को शीघ्रातिशीघ्र सम्पन्न करने जैसे मुद्दों पर भारतीय जीवन बीमा निगम में गठित सन्युक्त मंच जिसमें Cl-I अधिकारियों का संगठन (LIC Class I officers Federation), विकास अधिकारियों का संगठन (NFIFWI) तथा Class III एवं IV कर्मचारियों का संगठन (AIIEA) के संयुक्त मोर्चे के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर पूरे देश में सभी कर्मचारी दिनांक 18 मार्च 2021 अपनी मांगों को रखते हुए एक दिवसीय हड़्ताल पर रहे तथा कार्यालय बंद रहे ।

इस हड़्ताल को गति देने हेतु सभी कर्मचारी सुबह 9 बजे से ही अपनी मांगों तथा मजदूर विरोधी नितियों के खिलाफ नारेवाजी करते रहे। बीमा कर्मचारी संघ के सचिव साथी धर्म प्रकाश ने बताया कि इस देशव्यापी हड़्ताल के प्रमुख मांगों में निजीकरण का विरोध, LIC की शेयर बाज़ार में सूचीबध्धता व IPO का विरोध, एलआईसी की आईपीओ प्रक्रिया को तेज करने और विदेशी निवेश सीमा बढ़ाकर 49% से 74% करने का विरोध , सार्वजनिक संसथानों के निजीकरण का विरोध, LIC तथा GIC के शीघ्र वेतन समझौते की मांग, नई पेंशन स्कीम निरस्त कर पेंशन योजना 1995 लागू करना शामिल है ।उन्होंने बताया कि LIC का योगदान देश की अर्थ्व्यस्था में अतुलनीय है । देश के कुल निवेश का 25% LIC उपलब्ध कराती है, ढाँचागत विकास में 30 लाख करोड़ का निवेश है । 23 प्रतिस्पर्धी कम्पनियों के बावजूद LIC अग्रणी संस्था के रूप में स्थापित है । इसे निजी हाथों में देने से देश अपनी आर्थिक संप्रुभता खो देगा और इसके भयावह परिणाम होंगें ।. LIC IPO संबंधी बजट प्रस्ताव आत्मघाती है। एलआईसी की आईपीओ प्रक्रिया को तेज करने और विदेशी निवेश सीमा बढ़ाकर 49% से 74% तक ले जाने का सीधा अर्थ “आत्मनिर्भर भारत” को खुद सरकार द्वारा ही बट्टा लगाना है। अधिकारी – कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चा का यह मानना है कि LIC का IPO लाकर सरकार राष्ट्रीयकरण के बहुत उद्देश्यों को खुद ही कमजोर कर देगी। राष्ट्र और बीमाधारकों को लाभ पहुंचाने के बजाय अब LIC शेयरधारकों के लिए लाभ बनाने और मुनाफा कमाने के लिए काम करने के लिए मजबूर होंगी। सभी भारतीयों के स्वामित्व वाली संपत्ति और उसके लाभ का इस्तेमाल अब देश के चंद अमीरों के मुनाफे के हितार्थ किया जाएगा। सरकार ने चुपके से वित्त विधेयक में ही LIC अधिनियम के बदलावों को समाहित कर लिया है। बीमा अधिकारी कर्मचारियों ने इन विनाशकारी नीतियों के खिलाफ एक शक्तिशाली अभियान शुरू करने का फैसला किया है जिसमें लोगों के व्यापक हिस्से को जुटाना सुनिश्चित करना है।

आज भारतीय जीवन बीमा निगम के राष्ट्रीयकरण के 65 वर्ष हो रहे हैं. तो इन छः दशको की यात्रा को देखना समीचीन होगा कि राष्ट्रीयकरण के समय जो सपना देखा गया था, उसको पूरा करने मे यह संस्थान कहाँ तक सफल हुआ है. इस आधार पर जब हम भारतीय जीवन बीमा निगम का मूल्यांकन करते हैं तो पाते हैं कि निगम ने अपनी स्थापना के समय घोषित लक्ष्य में सौ फीसदी कामयाबी हासिल की है.

भारतीय जीवन बीमा निगम ने अपने व्यवसाय को दुनिया के मानदंड के अनुरूप विकसित किया है, उसे बढ़ाया है. आज निगम के पास लगभग 40 करोड़ से अधिक बीमाधारक हैं. यह संख्या भारत और चीन की जनसंख्या के बाद तीसरी सबसे बड़ी संख्या है.

निगम ने छोटी बचतों को इकठ्ठा कर सरकार को एक बड़ा फंड उपलब्ध कराया है, जिससे वह देश के विकास की विभिन्न परियोजनाओं मे उसका इस्तेमाल कर सके. आज भारतीय जीवन बीमा निगम के पास जो 32 लाख करोड़ का लाइव फंड है, उसमें से लगभग 24 लाख करोड़ रूपये सरकार की विभिन्न विकास परियोजनाओं में निवेशित हैं.

भारतीय जीवन बीमा निगम के दावा भुगतान का रिकार्ड बहुत शानदार रहा है । दुनिया की किसी भी बीमा कंपनी से बेहतर । यदि हम आंकड़ों मे बात करें तो लगभग 98% । यानि जो दायित्व निगम स्वीकार करता है, उसे निभाता भी है ।

1956 से लेकर आज तक भारतीय जीवन बीमा निगम ने चाहे दावे भुगतान हो, बोनस हो, survival benefits इत्यादि सभी का भुगतान पालिसी की सेवा शर्तों के अनुरूप किया है। देश की सर्वोपरि सार्वजनिक वित्तीय संस्थान का मोदी सरकार निजीकरण करके पालिसी धारकों की लघु-बचतों को शेयर मार्केट के द्वारा विदेशी निवेशकों को सौंपना चाहती है । आइए देश की समग्र जनता इस राष्ट्रविरोधी कदम का प्रबल प्रतिरोध करें।

भारतीय जीवन बीमा निगम में गठित सन्युक्त मंच जिसमें Cl-I अधिकारियों का संगठन (LIC Class I officers Federation), विकास अधिकारियों का संगठन (NFIFWI) तथा Class III एवं IV कर्मचारियों का संगठन (AIIEA) के बैनर तले बीमा कर्मचारी सरकारी कुचालों के खिलाफ प्रतिरोध को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ हैं। सरकार FDI बढ़ाने का निर्णय वापस ले, LIC का IPO न लाएं और सामान्य बीमा कंपनी का निजीकरण न करे।

इस हड़ताल को संबोधित संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां आम जनता कर्मचारियों किसानों के विरुद्ध है। आज केंद्र सरकार के निजीकरण की नीति जिसके तहत सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को बेच रही है देश के लिए घातक है। आज पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर कर तमाम देश की परिसंपत्तियों को कारपोरेट के हाथों में यह सरकार सौपना चाहती है।

इस हड़ताल को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के साथी बिध्यनाथ, साथी दिलीप कुमार और साथी गौतम कुमार लियाफी के साथी प्रदीप कुमार साव , झारखंड अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महामंत्री अशोक कुमार सिंह नयन,झारखंड कोलियरी मजदूर संघ के अध्यक्ष साथी हरिगौरी साहू,पेंशनर्स एसोसिएशन के साथी रघुनंदन विश्वकर्मा ने संबोधित किया।

संजय शर्मा, विजय कुमार, मृत्युंजय प्रसाद सिंह, अनुराग मुर्मू, संहीता सरकार, कुमकुम वाला बर्मा, डेनियल मरांडी ,राजेश कुमार उपाध्याय, उमा नाथ झा, शंकर कुमार, संजीव वोराल,प्रमोद कुमार शर्मा, रोशन कुमार, श्वेता, विनय कुमार, सुनील कुमार वर्मा अभय कुमार श्वेता कुमारी, दीपक पासवान, नीरज कुमार सिंह ,अनिल कुमार वर्मा , प्रवीण हसदा, नीतीश कुमार गुप्ता ,प्रीतम कुमार, गौरव आनंद, धर्मेंद्र गुप्ता, मनोज कुमार लाल,अंशु सिंघानिया ,सबा परवीन,प्रभाष शर्मा ,गौरव कुमार, संजय कुमार शर्मा ,महेश्वरी वर्मा, प्रदीप कुमार पंकज कुमार,विक्रम कुमार,दिनेश कुमार सहित सभी अधिकारियों कर्मचारियों ने भाग लिया।

गिरिडीह से डिम्पल की रिपोर्ट

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