जमशेदपुर के सर्किट हाउस में रविवार को तुरामडीह विस्थापित संयुक्त ग्राम सभा की ओर से एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में ग्राम सभा के प्रतिनिधियों ने हाल के राजनीतिक बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विस्थापित परिवारों की लड़ाई पुनर्वास, रोजगार और मुआवजे जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर है। ग्राम सभा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि हाल के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए गए कुछ राजनीतिक बयान विस्थापित परिवारों की वास्तविक समस्याओं को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं करते हैं। उनका कहना है कि इस आंदोलन को राजनीतिक रंग देने के बजाय मूल मुद्दों के समाधान पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
ग्राम सभा के अनुसार वर्ष 1984 से 2011 के बीच तुरामडीह, डुंगरीडीह, नंदूप, तालसा, उपरसाही और बड़कुंजरा सहित कई गांवों की भूमि खनन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। प्रतिनिधियों का दावा है कि बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार आज भी स्थायी पुनर्वास और रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
प्रेस वार्ता में यह भी दावा किया गया कि हाल के राजनीतिक कार्यक्रम में केवल कुछ विस्थापित परिवार शामिल हुए थे, जबकि अधिकांश प्रभावित परिवार संयुक्त ग्राम सभा के साथ अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
ग्राम सभा ने यह भी आरोप लगाया कि विस्थापन से प्रभावित स्थानीय बेरोजगार युवाओं को अब भी रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। प्रतिनिधियों ने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित कंपनी से संवाद के माध्यम से लंबित समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की।
समाचार प्रकाशित होने तक इस प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

