जमशेदपुर। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में शामिल होने पहुंचे हिंदू छात्र-छात्राओं के हाथों में बंधे धार्मिक कालावा (रक्षासूत्र) काटे जाने की सूचना पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कड़ा विरोध जताया है। विहिप के सिंहभूम विभाग मंत्री अरुण सिंह ने इस घटना पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि परीक्षा के नाम पर किसी भी छात्र-छात्रा की धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों के साथ छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जा सकती।
अरुण सिंह ने रविवार को जारी अपने बयान में कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि जमशेदपुर में आयोजित नीट परीक्षा के दौरान कुछ हिंदू छात्र-छात्राओं के हाथों में बंधे धार्मिक कालावा को परीक्षा केंद्रों पर काट दिया गया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में कालावा या रक्षासूत्र केवल एक धागा नहीं बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया के दौरान इसे हटाने या काटने की कार्रवाई हिंदू समाज की भावनाओं को आहत करने वाली है।
उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार किसी भी परीक्षा के नियमों में सनातन धर्म से जुड़े धार्मिक प्रतीकों को काटने का प्रावधान नहीं है। हालांकि इस मामले में वास्तविक स्थिति जानने के लिए वे जिला प्रशासन से परीक्षा संबंधी नियमों और दिशा-निर्देशों की जानकारी प्राप्त करेंगे।
विहिप नेता ने कहा कि सोमवार को जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस पूरे मामले की जानकारी मांगी जाएगी। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि किन परिस्थितियों में परीक्षार्थियों के हाथों से धार्मिक प्रतीक हटाए गए और इसके लिए किस स्तर पर निर्देश जारी किए गए थे।
अरुण सिंह ने मांग की कि यदि परीक्षा के नाम पर किसी हिंदू छात्र, छात्रा या अन्य परीक्षार्थियों के धार्मिक प्रतीक को जबरन हटाया या काटा गया है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं लेता है तो विश्व हिंदू परिषद और हिंदू समाज सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा।
उन्होंने कहा कि संगठन धार्मिक आस्था और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा इस विषय को हिंदू समाज के बीच भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।

