राजनगर।सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है। प्रसव के दौरान कथित लापरवाही और अव्यवस्था के कारण एक गर्भवती महिला और उसके नवजात बेटे की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया और अस्पताल परिसर में जमकर विरोध-प्रदर्शन हुआ।
मृतका की पहचान राजनगर प्रखंड के हाथीसिरिंग गांव निवासी बिनीता बानरा के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार बिनीता स्वयं स्वास्थ्य सहिया के रूप में कार्यरत थीं और उन्हें प्रसव पीड़ा होने पर राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उस समय बिजली गुल थी, जिसके कारण डॉक्टरों और स्टाफ को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी कराने की कोशिश करनी पड़ी। इस दौरान न तो पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था थी और न ही आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध थे, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला की हालत गंभीर होने के बावजूद समय पर न तो विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाया गया और न ही उसे किसी बड़े अस्पताल में रेफर किया गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित निर्णय लिया जाता, तो मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती थी। इलाज में देरी और लापरवाही ही इस दुखद घटना का मुख्य कारण बनी।
बताया जा रहा है कि बिनीता बानरा की पहले से दो बेटियां थीं और इस बार परिवार बेटे के जन्म को लेकर बेहद खुश था, लेकिन यह खुशी कुछ ही पलों में मातम में बदल गई। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। लोगों ने दोषी डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. श्याम सोरेन ने बताया कि उन्होंने हाल ही में प्रभार संभाला है और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी इस अस्पताल में अव्यवस्था, डॉक्टरों की कमी और संसाधनों के अभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि राजनगर सीएचसी में बिजली, उपकरण, विशेषज्ञ डॉक्टर और आपातकालीन सेवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
फिलहाल इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।

