Breaking
Fri. Apr 17th, 2026

चंद्रशेखर शताब्दी समारोह में सरयू राय बोले—रिश्तों को निभाने वाले अद्वितीय नेता थे पूर्व प्रधानमंत्री

जमशेदपुर। जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से शहर के मिलानी हॉल में देश के पूर्व प्रधानमंत्री Chandra Shekhar के शताब्दी वर्ष जयंती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक Saryu Roy मौजूद रहे, जबकि बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों ने भागीदारी निभाई।

अपने संबोधन में सरयू राय ने चंद्रशेखर को एक ऐसा नेता बताया, जो आलोचनाओं को व्यक्तिगत नहीं मानते थे और संबंधों को सर्वोपरि रखते थे। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर का व्यक्तित्व अद्वितीय था और उनके जैसा कोई दूसरा नेता होना मुश्किल है। वे स्पष्टवादी और बेबाक थे, यही कारण था कि युवाओं के बीच उनका विशेष सम्मान था।

सरयू राय ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके चंद्रशेखर के साथ रिश्ते कभी मधुर तो कभी मतभेदों से भरे रहे, लेकिन इन मतभेदों का असर व्यक्तिगत संबंधों पर कभी नहीं पड़ा। उन्होंने याद किया कि Jayaprakash Narayan के आंदोलन के दौरान चंद्रशेखर सक्रिय रूप से जुड़े और जेल भी गए। बाद में उन्होंने सरयू राय को जनता पार्टी में अहम जिम्मेदारी सौंपी।

उन्होंने चंद्रशेखर की ऐतिहासिक पदयात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि कन्याकुमारी से राजघाट तक की लगभग 4600 किलोमीटर लंबी यात्रा ने उन्हें राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। इस दौरान वे विभिन्न राज्यों में ‘भारत यात्रा ट्रस्ट’ का गठन करते गए। हालांकि इस पर सरयू राय ने असहमति जताई थी, लेकिन चंद्रशेखर ने इसे व्यक्तिगत मुद्दा नहीं बनाया और उनके प्रति स्नेह बनाए रखा।

सरयू राय ने कहा कि चंद्रशेखर अपने संबंधों को कभी छिपाते नहीं थे। चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, वे रिश्तों को निभाने में पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब Surya Dev Singh जेल में थे, तब चंद्रशेखर उनसे मिलने स्वयं जेल पहुंच गए थे, बिना इस बात की परवाह किए कि लोग क्या कहेंगे।

उन्होंने चंद्रशेखर के प्रधानमंत्रित्व काल का जिक्र करते हुए कहा कि कठिन आर्थिक हालात में देश के स्वर्ण भंडार को गिरवी रखने जैसा कठोर निर्णय भी उन्होंने लिया। उनका मानना था कि अल्पकालीन कार्यकाल में भी उन्होंने देशहित में महत्वपूर्ण फैसले किए। इसी संदर्भ में उनके समर्थकों द्वारा ‘चार माह बनाम चालीस साल’ का नारा भी दिया जाता था।

सरयू राय ने बताया कि चंद्रशेखर और Indira Gandhi के बीच मतभेद होने के बावजूद उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में ऐसी स्वतंत्रता दुर्लभ हो गई है।

उन्होंने चंद्रशेखर और Atal Bihari Vajpayee के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों के बीच गहरी मित्रता थी। संसद में दोनों के बीच हंसी-मजाक और आत्मीयता के कई उदाहरण देखने को मिलते थे।

कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी शिवशंकर सिंह ने भी चंद्रशेखर के सरल और सहज स्वभाव को याद किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित उनके आवास पर आम लोगों के लिए भोजन और ठहरने की खुली व्यवस्था रहती थी, जो उनके जनसरोकारों को दर्शाता है।

कार्यक्रम का संचालन जदयू के महासचिव कुलविंदर सिंह पन्नू ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन महानगर अध्यक्ष अजय कुमार ने किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने चंद्रशेखर के विचारों को वर्तमान राजनीति के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।

Related Post