जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा निवासी तथा झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के पूर्व विधायक और प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक सफलतापूर्वक पहुंचकर एक प्रेरणादायक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने मंगलवार को अपने इस साहसिक अभियान के अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि यह यात्रा उनके जीवन की सबसे चुनौतीपूर्ण और यादगार यात्राओं में से एक रही।
कुणाल षाड़ंगी ने बताया कि एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचना केवल शारीरिक ताकत का नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता का भी बड़ा इम्तिहान होता है। इस यात्रा के दौरान उन्हें बर्फ से ढके दुर्गम रास्तों, शून्य से नीचे तापमान, तेज हवाओं और कम ऑक्सीजन जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर सांस लेने में कठिनाई और थकान के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस ट्रेक ने उन्हें खुद को करीब से जानने और अपनी सीमाओं को परखने का मौका दिया। हर कदम पर चुनौती थी, लेकिन हर चुनौती ने उन्हें और मजबूत बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की यात्राएं व्यक्ति को धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास सिखाती हैं।
कुणाल षाड़ंगी की इस उपलब्धि को क्षेत्र के लोगों और युवाओं द्वारा काफी सराहा जा रहा है। उनके इस साहसिक कदम से युवाओं को यह संदेश मिलता है कि यदि संकल्प मजबूत हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने जीवन में नए-नए अनुभवों को अपनाएं और चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका डटकर सामना करें।
इस उपलब्धि के साथ कुणाल षाड़ंगी ने यह साबित कर दिया है कि जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ वे साहसिक और प्रेरणादायक व्यक्तित्व के भी धनी हैं। उनकी यह यात्रा न सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय बन गई है।

