*नई दिल्ली* देश की संसदीय राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को एक बार फिर राज्यसभा का नामित सदस्य नियुक्त किया है। यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत की गई है।
यह सीट रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हुई थी। हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हुआ था, जिसके बाद उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
हरिवंश नारायण सिंह का झारखंड, खासकर रांची से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने हिंदी दैनिक प्रभात खबर के प्रधान संपादक के रूप में काम करते हुए क्षेत्रीय पत्रकारिता को नई दिशा दी। उनके नेतृत्व में चारा घोटाले जैसे बड़े मामलों का खुलासा हुआ, जिसने अखबार को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
पत्रकारिता से राजनीति तक के अपने सफर में उन्होंने ‘धर्मयुग’ और ‘रविवार’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में काम किया और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मीडिया सलाहकार भी रहे। वर्ष 2014 में वे जनता दल (यूनाइटेड) के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे।
वे 2018 और 2020 में राज्यसभा के उपसभापति भी रहे और अपने संतुलित संचालन के लिए जाने गए। हालिया राज्यसभा चुनाव में जदयू द्वारा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें लग रही थीं, जिन पर अब विराम लग गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मनोनयन उनके अनुभव और संसदीय योगदान का सम्मान है। साथ ही, यह मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को भी दर्शाता है।
एक बार फिर हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आएंगे। उनके अनुभव से सदन की कार्यवाही को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

